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Friday, November 18, 2016




Special friendship  Comments

                                                                   '' नीतिभा ''
दादी माँ नितिभा को कहानी सुना रही थी, वो भी तब, जब नीतिभा दादी के बहुत पीछे पड़ी थी कि प्लीज दादी कोई कहानी सुनाओ ना ।  तब दादी  गहरी सांस लेकर नीतिभा से बोली की आज मैं तुम्हे अपने बचपन की कहानी सुनाती हूँ, जो मेरी दादी मुझे सुनाती थी । 


दादी कहानी सुना रही हैं, और नीतिभा बड़े धयान से सुन रही है । धुरुवा रात के अंधेरे में जंगल की ओर बढे जा रही थी। वह  ज्यादा बड़ी नहीं थी, उसकी उम्र यही कोई सात या आठ बरस की रही होगी । धुरुवा जैसे -जैसे जंगल की ओर बढे जा रही थी, अँधेरा और घना होता जा रहा था। लेकिन धुरुवा को कोई भी डर नहीं लग रहा था क्यूंकि  उसकी सहेली अनन्या ने उसको बताया था की  घने जंगल के अंदर जो मंदिर  है उसमे अगर रात के  घने अंधरे में जाकर मन्नत मानगो तो वे अवश्य पूरी होती है । 

और  धुरुवा की बहुत सारी  विश थी- जैसे माँ ठीक हो जाये, दादी माँ के घुटनो का दर्द ठीक हो जाये, उसका राज्य शत्रुओ से मुक्त हो जाये, उसके राज्य में सब के पास धन- सम्पदा हो, उसकी सहेली अनन्या को वो सुनहरे बालो वाली , नीली आँखों वाली बड़ी सी गुड़िया मिल जाये, आदि -आदि। 


ना जाने क्यों दादी की आंखे गीली हो गयी थी। दादी ने अपनी गीली आँखों को पोछ कर बोलने के लिए मुह खोला ही था कि नीतिभा दादी के दोनों हाथों को अपने नन्हे- नन्हे हाथों में लेकर बोली, दादी क्या हुआ ? दादी नीतिभा को लाड लडाते हुए  बोली कुछ नहीं हुआ बेटा । फिर नीतिभा से बोली, चल आगे की कहानी सुन , धुरुवा को मंदिर दिखाई देने लगा था। मंदिर देखते ही उसके पैरों में बहुत ताकत आ गयी थी ।  वो भाग कर मंदिर के अंदर गयी , वहां देखा तो एक  सुन्दर सी स्त्री बाल खोले लाल रंग की साड़ी में भगवान् की आरती कर रही थी ।  धुरुवा भी वहाँ हाथ जोड़ कर खडी हो गयी। आरती समाप्त  होने के बाद  उस सुन्दर स्त्री ने धुरुवा को प्रसाद दिया और इतनी रात को उसके आने का कारण भी पूछा ? धुरुवा  ने  अपनी सभी विश बता दी , जिसे सुनकर उस सुन्दर  स्त्री ने धुरुवा के गालों पे बड़े प्यार से हाथ फेरा और बोली की भगवान्  बच्चों की विश जरूर पूरी करते हैं । और  तभी घडी का अलार्म बहुत तेज-तेज बजने लगा , धुरुवा! धुरुवा!  माँ जोर - जोर से चिलाते हुए धुरवा के कमरे में आयी, धुरुवा ने आंखे खोल कर देखा तो वो अपने बेड पर थी। ..... 


दादी , ने अपनी कहानी ख़तम करके देखा तो नीतिभा गहरी नींद में सोई हुई थी ।  दादी भी नीतिभा की बगल में लेट कर सो गयी । 
चलते - चलते =
" कोई जगा  ना देना मुझको मेरी इन जादू भरे सपनो से 
सोने दो मुझे सोने दो और खोने दो मुझे इन मीठे-मीठे सपनो में।  ....... "

Special friendship  Cards      

Sunday, May 8, 2016


Nature scraps, nature pictures and images for orkut, myspace, blogs, forums

                        "मार्मिक"
 धरा, और मार्मिक बचपन के दोस्त हैं पर  ,मार्मिक ने कभी धरा को,दोस्त से अतिरिक्त कुछ नहीं माना।पर आज,मार्मिक धरा को अपलक दृष्टि से देखता रह गया,धरा ने स्काईब्लू कलर का ईवनिंग गाऊन पहन  रखा था,उस पर कंधे तक उसके खुले बाल,पिंक लिप्स सबसे बड़ी बात उसका दूधिया रंग जिसे देखकर लगता है मानो शीतलता की बरसात हो रही हो....
मार्मिक जब रात को बैड पे लेटा, तो उसकी आँखों के सामने धरा का चेहरा घूमता रहा । रात को न जाने किस वक्त उसको नींद आई होगी,सुबह में उसने सोचा । मार्मिक को अपने दोस्तों की बात याद आ गई,"जब रात को किसी लड़की का चेहरा सोने ना दे तो समझ लो कि यारों,प्यार हो गया है" ना जाने क्यों मार्मिक के चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान खेल गई...
मार्मिक,अपनी फेवरेट जगह "हिल पाइन्ट" पर पहुँच गए,और अपनी दोनों बांहें फैला कर मानों बहती पुरवा हवा को अपनी बाँहों में भर लेना चाहते थे,उसमें उनको अपनी धरा का अहसास जो हो रहा था ।"हिल पाइन्ट" से वापस लौटते वक्त मार्मिक ने अपनी  बाइक धरा के घर की तरफ मोड़ ली ....

धरा, अपने घर की छत पे खडी,दूर से ही दिखाई दे रही थी । शायद,"वो" 'सन सैट' देख रही थी । मार्मिक के हाथ डोरबेल की तरफ बढे ही थे, कि,छत से नीचे झाँकते हुए, चिहुँक कर धरा की आवाज आई 'ओ मार्मिक' तुम ! अभी आती हूँ । धरा ने झट से नीचे आकर पट से डोर खोल दिया , धरा ने परपल कलर का ईवनिंग गाउन पहन रखा था, She is looking awesome...

मार्मिक का दिल किया, कि आगे बढ़ कर धरा को अपने उसी के लिए धडकते दिल से लगा लूँ....पर मार्मिक ने अपने इमोशन को काबू करते हुए,धरा के सर पे एक प्यार भरी चपत लगाते हुए बोला,बड़ी प्यारी लग रही हो । धरा के चेहरे पे एक दिल को सुकून देने वाली मुस्कान खेल गई...

धरा,मार्मिक को घर के अंदर ले आई,मार्मिक केन के बने झूले पे बैठ गया । धरा ने मार्मिक से पूछा स्ट्राबरी शेक चलेगा ? मार्मिक हँसते हुए बोला दौडेगा...

धरा फ्रेश स्ट्राबरी शेक बना लायी साथ में पोटैटो वेफर्स भी ले आई ।मार्मिक ने सिप लेते हुए कहा,अच्छा बना है ।धरा ने थैंक्स कहा ... मार्मिक ने आगे बात बढाते हुए कहा,तुमसे एक बात पुछूँ ? धरा बोली हाँ,कहो ना..मार्मिक ने कहा मुझसे शादी करोगी ? धरा ने अपनी लजाती पलकों को झुका लिया ,मार्मिक ने आगे बढ़कर धरा के हाथों को अपने हाथों में बाँध लिया...
चलते चलते _______फासले मिटा कर आपस मे प्यार  रखना ,
 प्यार का रिश्ता यु ही  बरक़रार रखना ,
बिछड़ जाये कभी आपसे हम ,
तो,आँखों मे हमेशा इंतज़ार रखना    .........

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Monday, February 1, 2016




                                                                            ''धानी''
धानी ने साड़ी के पल्ले में पिन लगाते हुए सोचा,कि आज आकाश से बात करके ये फाइनल कर लेगी,कि आखिर वो इस बार छुट्टियों में जा कहाँ रहे हैं।आकाश इतने दिनों से टालते आ रहे हैं,दोनों बच्चे,अम्बर और निलिमा नैनीताल के बोर्डिँग स्कूल में पढ़ते हैं,समर में भी एक्टीविटी क्लास के चलते बस एक या दो दिनों के लिए ही  घर आ पाते हैं।
बहुत दिनों से वो मारीशस जाने की सोच रही है,पर जाने के ऐन टाइम पर ही आकाश के फारेन डैलिगेट आने की वजह से जा नहीं पाये थे।घानी ने बालों का जूडा बना लिया,घुटनों तक लहराते उसके बालों पर आकाश आज भी जान छिडकते हैं।आज सुबह ही माली काका फ्रैश फूलों का गुलदस्ता बना कर लाये हैं,उसमें से धानी ने रैड रोज निकाल कर अपने बालों में खोंस लिया ।
तभी गँगा ने आकर पूछा, मेमसाब आज खाने में क्या बनेगा?आकाश की पसंद का खाना बनाने को कह दिया,बैंगन का भरता,अरहर की दाल और बूँदी का रायता साथ में रोटी चावल सलाद और आचार।
धानी अपने मोबाइल पर कैंडी क्रैश खेलने लगी वो कैंडी क्रैश के हजारवे लेवल पे है,समय बिताने का आधुनिक सबसे सरल और उत्तम साधन आई लव कैंडी क्रैश ये सब सोचते हुए उसके चेहरे पर एक नोटी सी मुस्कान खेल गई ।
बाहर पोर्च से गाड़ी की आवाज आई,धानी ने घड़ी देखी तीन बज चुके थे। आकाश लँच पर आ गए हैं,महाराज को खाना लगाने का बोलकर वो बाहर की तरफ लपकी,आकाश मोबाइल पर बात करते हुए सीधे स्टडी रूम की तरफ जा रहे हैं,ये देख कर धानी भी उनके पीछे चलती हुईं ,आकाश को कैच करने का एक असफल प्रयास कर रही थी ।उसको मालूम था ,कि एक बार स्टडी में जाने पर आकाश घँटे भर से पहले बाहर आने वाले नहीं हैं ।
वो फिर से कैंडी क्रैश खेलने लगी,अभी उसने एक लेवल खेला ही था की,डायनिंग टेबल से आकाश की आवाज आई धानी,हाँ कहती हुई धानी टेबल की और लपकी । साथ ही सोचती भी जा रही थी की आकाश इतनी जल्दी कैसे बाहर आ गए....
 अभी ये सोच ही रही थी की,आकाश लगभग ज़ोर से चिल्लाते हुए बोले धनि तुम्हारी मॉरीशस की फ्लाइट की टिकिट करवा दी हैं मैंने,धनि ने प्रश्नवाचक नज़रों से आकाश को देखा ,आकाश ने धनि के गालों पे हलके से चपत लगते हुए कहा की हम दोनों जा रहे हैं पगली। धनि आकाश की सीने से ज़ोर से चिपक गयी,उसके चारों और मनो वसंत छा  गया। हैप्पी एंडिग। .  ..... अरे नहीं नहीं ये क्या सोच  बैठी  हैप्पी बिगनिंग  :)
चलते चलते ____तेरे हाथ की मैं काश वो लकीर बन जाऊ,काश मैं तेरा मुकद्दर तेरी तकदीर बन जाऊ
 मैं तुझे इतना चाहू की तू भूल जाये हर रिश्ता ,सिर्फ मैं ही तेरे हर रिश्ते का जवाब बन जाऊ
तू आँखे  बंद करे तो तुझेआऊ  मैं ही नज़र ,इस तरह मैं तेरे हर ख़्वाब की ताबीर बन जाऊ  .......                      
                             
 

Thursday, January 1, 2015

 


                                                                    '' उलझन ''

नैना ने,ज़ोर की अंगड़ाई लेते हुए घडी की तरफ देखा ,रात के दो बजे थे । नैना को पढ़ते वक़्त भी लग रहा था ,की जैसे आज वक़्त की रफ़्तार बहुत काम हो  गयी है।नैना को ,आकाश से मिले काफी समय बीत गया,वो सेमिनारके लिए गए हुए हैं । उसे अपनी वो मुलाकात याद आ गयी जब दोनों चौपटी पे गोल गोल घूमते हुए आपस में फेरे लेने की बात पे रोमांटिक हो जाते थे ।  
 
मम्मी ने कितना बोला उसको,  नैनू  पराग से शादी कर ले,चाय घर का है,और शादी के बाद तू मेरे पास भी रहेगी लेकिन उस पे तोह आकाश का भूत सवार था । आकाश एक बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं,जब देखो तब सेमिनारों अथवा तो बिजनेस के कार्य से विदेशों  में ही घूमते रहते हैं :'( काश की उसने माम की बात मान ली होती तो। .... 
ऐसा नहीं की आकाश उसका धयान नहीं रखते,वो तो  से भी ज्यादा पयार करते हैं । :)
 
बहुत बार उसको अपने साथ फॉरेन भी लेकर जा चुके हैं,लेकिन वो साल के तक़रीबन छह सात महीने विरह में ही कटती है,ऐसा नहींकी वोही ऐसे रहती है उसकी फ्रेंड सोनल भी ऐसेही पति विरहा में तड़पती रहती है । रीतिका को देखो हर टाइम अपने पति के आगोश में रहती है पति के सानिंध्य का सुख क्या होता है,यह तो कोई नैना से पूछे ।
 
अभी वो ऐसी उधेड़बुन में ही थी की बहार से हौंडा का हॉर्न बजा,नैना चिहुक पड़ी लगभग भागते दौड़ते आई बिना चप्पल के और आकाश से लिपट गयी और उसी के साथ उसने जो भी अपनी खयालो की नदी में डुबोया था सब भूल गयी। अब न उसे माँ याद आई न ही रीतिका ,क्यूंकि अब उसके पास आकाश जो था उसका अपना आकाश । … इस रात की कभी सुबह न हो ऐसा सोच कर नैना आकाश के आगोश में समां  गयी । 
 
चलते चलते -
दूर दूर रह कर भी हम कितने करीब हैं,
हमारा रिश्ता भी जाने कितना अजीब है,
बिन देखे ही तेरा यूँ मोहब्बत करना मुझसे,
बस तेरी यही चाहत ही तो मेरा नसीब है,
 
 

Wednesday, January 1, 2014



Anniversary Orkut Scraps, Comments, Images

                                       '' शैल चन्द्र ''

शैल    ने    अपनी   अलमारी    खोली   सारी   साड़ियों  के  बीच   में   से   उसने  अपनी   शादी   कि   साडी   पर  प्यार   से  हाथ  फेरा  आज   उसकी   विवाह   कि   वर्षगाठ   है, चन्द्र शेखर उसे   आज   भी  उसे   बिलकुल   नवविवाहिता    कि  तरह  रखते  हैं ।उसने   बेड   के  पास  रखी,  'शेखर'  कि  फ़ोटो    पर   कुर्बान   हो   जाने  वाली  दृष्टि    डाली,  और   उसके  होंठो  पर  एक   तृप्ति   भरी  मुस्कान  खिल  उठी , मगर   नेत्र   सजल  हो  गये  ।

वो    दादी  कि  कितनी  दुलारी  थी , दादी  शैल  -शैल   कहते  थकती  नहीं  थी , और  वो   भी  तो  दादी  का  कितना  ख्याल  रखती  थी  । दादी  कि  एक  आवाज़  पर  ही, रात  को   चाहे   वो  कितनी  भी  गहरी  नींद  में  हो  उठ  कर  खड़ी   हो   जाती  थी  । और  फिर  दादी  के  जाने   के  बाद   'माँ  -पापा'  कि  दुलारी  हो  गयी ,  और  आज  भी  है । 

अभी   वो  ये  सब  सोच  ही  रही  थी  कि, उसका  मोबाइल  फोन  घनघना  उठा । उसने   देखा  'पापा  का फोन  है' ,पापा  ने  शैल  को   बधाई   दी ,पापा  से  बात  करते  -करते  शैल  कि  आवाज़  भरभरा  गयी , पापा  बोले  शैलू   क्या  हुआ  बेटा? शैल   ने  उत्तर  दिया  कुछ  नहीं  पापा  आप दोनों  को  बहुत  मिस   कर  रही  हु  । तभी  'माँ  कि  आवाज़'  आयी ''बधाई  हो  बेटा  तुम्हे  और  दामाद जी  दोनों   को'' माँ  आप   कैसी  हो ? मै   और  तेरे  पापा  बिलकुल  ठीक  हैं , और  तुम  लोग  कब  आ  रहे  हो  यहाँ  इंडिया  में ? पता  है  पुरे  नौ  साल  हो  गए  हैं  हमें  तुझे  देखे  हुए,और  ये  कहते  -कहते  माँ  कि रोते -रोते   हिचकियाँ  बंध  गयी, पापा  ने  माँ  के  हाथों  से  फोन  ले  लिया, ये  कहते  -कहते  कि  आज  के  दिन  भी  बच्ची  को  रुलाओगी   क्या । फिर  भरे  कंठ  से  पापा  बोले  शैल  बेटा   रखता  हूँ ,अपना  ख्याल  रखना  और  हो  सके  तो  आने  कि  कोशिश  करना  बेटा ।हाँ  पापा  मै  आउंगी  बहुत  जल्दी  ये  कहते  हुए  शैल  ने  फोन  रख  दिया । 

तभी  पोर्च  में  चन्द्र शेखर  कि   कार  कि  आवाज़  आयी ,शैल  ने  अपने  चेहरे  पर  जल्दी  से  पानी  कि  छीटे   मारी ,  तब  तक ' चन्द्र '  अंदर आ  चुके  थे । चन्द्र  ने  आते  ही  शैल  कि  भीगी  आँखों   को  भांप  लिया  और  बोले ''माँ -पापा ''  से बात  हुई  थी  ? हम्म , शैल  बोली  वो  बधाई  दे  रहे  थे , चन्द्र  ने  अपने  दोनों  हाथो  में  शैल  का  हाथ  लेते  हुए  कहा  कि  चलोगी  माँ  पापा  से  मिलने ! ''ओ   शेखर''  और  वो चन्द्र  से  लिपट  गयी ,चन्द्र  बोले  चलो   बैग  पैक  कर  लो  पांच  घंटे  बाद  हमारी  फलाईट  है!

शैल  ने  जल्दी-जल्दी  हाउस मिस्ट्रेस  को  जरुरी  निर्देश  दिए , और  एक घंटे  के  अंदर -अंदर  वो  तैयार  थे । शैल  ने  इसी  बीच  ये  सब  सोच  लिया  था , कि किस  को  क्या  गिफ्ट  देना  है  । आज  तो  पुरे  विश्व  में   एक  ही  देश  का  सामान  मिलता  है , सो  राजधानी  से  ही  सबके  लिए कुछ    न  कुछ  ले  लेंगे । चलो  भई,  चन्द्र  बहार  से  कहते  हुए  आये, काफी  लम्बा  रन  है ,और  फिर  एअरपोर्ट  कि  फॉर्मेलिटी  भी  तो  पूरी  करनी  पड़ती  है । फिर  एक दम  चौँक  कर  बोले , बस  यही  एक छोटा  सा  बैग ! हाँ  शैल  ने  अपनी  साडी  का  पल्लू सम्भालते  हुए  कहा । फिर  चन्द्र  स्वयं  ही  ज़ोर से   हंस   पड़े  ओह , इस  बार  पूरी  शौपिंग  अपने  ही  देश  में  होगी, और  फिर  मुस्कराते  हुए  उन्होंने एक  हाथ  में  अपना  बैग  उठा  लिया , और  दूसरे  हाथ  से  शैल  कि  पतली  कमर  को  थाम  कर बहार  कि  तरफ  बढ़  चले  । 

इस वक़्त  वो  दोनों  प्लेन  में  हैं , एक  साथ , शैल  बहुत  रोमांचित  हो  रही  थी ।  उसने चन्द्र शेखर  कि  तरफ  देखा , वो  सीट  में  लगे  कंप्यूटर  पर  गेम  खेलने  में  बिजी  थे । शैल  ने  खिड़की  से  बहार  बादलों  को  देखा ,और  प्लेन  जब  राजधानी  पहुचेगा  तब  पहुचेगा  मगर  शैल  तो  अभी  अपनी  आत्मा  से  अपनी  यादों  से  वहाँ  पहुच  चुकी  थी । 

 सवेरे  वो  लोग  अपने  देश  कि  मिटटी   पर  थे , अपना  वतन  शैल  अपने  देश  कि  हवाओ  को  अपनी  साँसों  में  अंदर  तक  भर  लेना  चाहती  थी । शैल  ने  चन्द्र  कि  तरफ  देखा,  उनकी आँखों  से अश्रु  बह  रहे  थे । शैल  को  अपनी  और  देखता  पा   चन्द्र शेखर  बोले कुछ  नहीं बस ये तो ख़ुशी के  आंसू हैं । शैल बोली  'थैंक यू ' चन्द्र  इतना कीमती  तोहफा देने के लिए इससे  कीमती  गिफ्ट मेरे लिए कुछ नहीं हो  सकता । एयर पोर्ट से बहार  आये  तो  देखा  माँ -पापा खड़े हैं , शैल ने चन्द्र शेखर कि तरफ देखा तो वो बोले कि मैंने फोन कर दिया था !और माँ ने  शैल  को  देखते  ही अपनी  दोनों  बाहें  फैला  दी , और  शैल किसी  शिशु  कि  भांति  माँ  कि ममतामयी  स्नेहिल  अंक में समां  गयी , उसने धीरे  से  पापा कि तरफ  देखा  वो  अपने  चश्में  का  शीशा  साफ़  कर  रहे  थे  अपनी  भीगी पलकें  लिए  चन्द्र ने धीरे से  अपने  रुमाल  से  पापा  के  आंसू  साफ़  किये  और  फिर  पापा  के  पैरों  में  झुक  गए  उनका  आशीर्वाद लेने  के  लिए । …।     

 

चलते- चलते =दुआओँ कि  भीड़  में एक  दुआ  हमारी ,
                       जिस  में  मांगी हमने हर  ख़ुशी  तुम,

                      जब भी मुस्कराये आप  दिल  से,

                      समझो दुआ  कबूल  हुई  हमारी  … ....    

                           

            
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Tuesday, January 1, 2013

''aarya''



Romantic Scraps
                                                                 ''आर्या''
आर्या  बालकनी  में  खड़ी  थी, आती  हुई  गुलाब  की  खुशबू  आर्या   को बीते  कल  की  गलियों  में  ले  गयी ।उस  दिन  आर्या  ने  अपनी  पसंद  का  बिलकुल  खिलते  गुलाब  के  रंग का  ड्रेस  पहना  था, तब  आर्या  सिर्फ  अपने  में  ही  गुम   रहती  थी ।सुंदर -सुंदर  कपडे  पहनना  और  ''बाळ पुस्तको '' में  खोये  रहना  बस  यही  उसकी  जिंदगी  थी ।'माँ '  तभी  बहार  से  आती  रोहित  की  आवाज़  ने  मानो   आर्या को  मीठी  नींद  से  जगा  दिया  हो, पूरा  साहस  इकठ्ठा  करके  आर्या  बोली  'हाँ  बेटा  m here'  रोहित  चट  से  आकर  माँ  से  लिपट  गया और  बोला 'love you mom, you are great mom in the whole world' 'o मेरा  बच्चा '
तभी  घनघनाती  मोबाइल  फ़ोन  की  घंटी  बज  उठी,आर्या ने  देखा  तो  फ़ोन  उसकी  माँ  का  था।'हाँ  माँ  कैसी  हो' ? '' में तो ठीक हु '' '' तू अपनी  सुना '' '' सुना  है  रोहित बोर्डिंग से घर   आया हुआ  है ''।'हाँ  माँ', तो ''रोहित  को  लेकर  यहाँ  क्यूँ  नहीं  आ जाती '' 'नहीं  माँ  अभी  तो  आना  संभव  नहीं  हो  पायेगा ,रोहित  के  पापा  ने  हिल स्टेशन  का  प्रोग्राम  बना  लिया  है ' '' ठीक  है ,तो  आ  जाती  रोहित  को  लेकर  तो  मुझे  और  तेरे  पापा  को  अच्छा   लगता, चल बच्चे  खुश  रहे  तो  उसी  में  ही  बड़ो  की  ख़ुशी  है ,अपना,  रोहित  का  और  दामादजी  का  धयान  रखना ...रखती   हु ''

रोहित  तब  तक  बहार  खेले  जा  चूका  था । आर्या  अपने  बालो  को  कंघी  करने  के  लिए  'ड्रेसिंग टेबल' पर  आई,  और  बालो  को  काढते -काढते  फिर  से  अपनी  दुनिया  में  खो  गयी ......उस दिन  अपनी  गुलाब  के  रंग  की  ड्रेस  पहन  कर  आर्य  जैसे  ही  बहार  हॉल  में  आई  उसे  मनु  और  उसका  भाई  अभिनव  दीखाई   दिया , अभिनव  गहरे  नीले  रंग  के  कोट  में  किसी  फ़िल्मी  हीरो  से  कम  नहीं  लग  रहा  था, जहाँ  आर्या अभिनव  को  देख  कर  मन्त्र मुग्ध  हो  गयी  थी , वहीँ  अभिनव भी  आर्या को  देख कर  अपना  सब  कुछ  भूल   बैठा था ।

मनु  आर्या की  बचपन  की  सहेली  थी, अभिनव  ने  मनु  से  कहा  की  मैं   'चलता  हु' तो  मनु  बोली  भैया      बस  पाच  मिनट  में  मैं  भी  चलती  हु ।  और  उन  पाच  मिनटों  में  मनु  ने आर्या   से  क्या  कहा , आर्या  को  कुछ  भी  याद  नहीं !!

मानस  के  घर  आने  का  टाइम  हो  गया  था , तभी  पोर्च  में  कार  के  रुकने  की  आवाज़  सुनाई   दी ।मानस  ने  घर  में  घुसते  ही  आर्या  से  पूछा  पैकिंग  हो  गयी? बस  अभी  डिनर  के  बाद  करती हु, ज्यादा  टाइम  नहीं  लगेगा  ।

अगले  दिन  रात  को  आर्य  अपनी  फॅमिली  के  साथ  हिमाचल  के  हिल स्टेशन  पर  थी ।जब  आर्या  अपने  पति  और  बच्चे  के  साथ  होटल  के  रूम  में  जा  रही  थी, तो वहीँ  कोरिडोर  में  अभिनव  से  सामना  हो  गया ! आर्या स्तब्ध  सी  रह  गयी , नज़रें  झुक  कर  या  यु  कहिये  की  चुप  कर  अपने  रूम  में  पहुची ।आर्या को  लगा  की  अभिनव  भी उससे  बचना  चाहते  हैं।अभिनव  के  साथ  उसकी  वाइफ   रूही  भी  थी , दोनों  की  जोड़ी बहुत  अच्छी  लग  रही  है ,आर्या  ने  सोचा ।

आर्या  को  घुमने  का  ज़बरदस्त शौक  है ,मानस तो  एक  बैंच  पर  बैठ  गए  की तुम  लोग  घूम लो !  रोहित  वहीँ के  विडियो  पार्लर  में  चला  गया,  अब  तीन - चार  घंटे  को  तो उसे  कोई  होश  नहीं  रहेगा । आर्या अकेले  ही  आगे  बढ़ने  लगी , थोडा  आगे  जाने  पर  उसे  अभिनव   दीखाई  दिए ,रूही  उनके  साथ  नहीं  थी !अभिनव   आर्या के पास  ए  और  बोले  ''कैसी  हो''? आर्या  के  मुह  से  कोई  भी  बोल  नहीं  फुटा तो  अभिनव  स्वयम  ही  बोलते  चले  गए और  आर्या  से  पूछ  बैठे ''तुमने  मेरा  इंतज़ार  क्यूँ नहीं किया'' उत्तर  में  आर्या  की  रुलाई  फुट  गयी ।और  बस  इतना  ही  बोल  पाई  की  हम दोनों  के  लिए   यही ठीक  था ,और  भरे  कदमो  से  मानस  के  पास  लौट  चली  आर्या ।  
चलते -चलते में कुछ मशहूर  पंक्तियाँ

चलते -चलते =
With this passing year,
lose the pains and keep the memories.
May you always shower a smiling face,
in years to come.
I wish you a very Happy New Year.2013



Rose Scraps

Wednesday, August 1, 2012

andhiyari raat (1)(STORY)


Good Night Comments


मुकेश  अपने  हाथ  में  लालटेन  लिए  हुए  उस  अँधेरी  गहरी  सुरंग  में  आगे  बढता  चला  गया | आज  वह  अपना  अधुरा  काम  पूरा  करना  चाहता  था, यह  सुरंग  उसके  सात  पीढ़ी  में कोई भी  पार  नही  कर  पाया  था !! कोई भी  नही  जनता   था  की  ये  सुरंग आखिर  जाती  कहाँ  पर  है? मुकेश  ने  एक  गहरी  लम्बी  सांस  ली  और  मज़बूत  इरादे  के  साथ  उस  गहरी  लम्बी  सुरंग  में  बढ़ता  चला  गया ।मुकेश  को  ऐसा  लग  रहा  था,  जैसे  उसके  पैरों  के  नीचे  किसी  ने  मखमली  कालीन  बिछा  दिया  हो । लालटेन  को  तनिक  नीचे  झुकाकर  ज्यू  ही  मुकेश  ने  देखा तो  वो  देखता  ही  रह  गया ! रेड कलर  का कारपेट  बिछा  हुआ  था !मुकेश  संभल-संभल  कर  आगे  बढ़ता  जा  रहा  था । कुछ  आगे  जाने  पर  उसे  किसी  झरने  के  गिरने  की  आवाज़  सुने  दी, सुरंग  की  एक  साइड  में  'सुनहरे पानी का एक वाटर फाल '  था ऐसा  लग  रहा  था  की  मानो  पिघला  हुआ  'सोना'  बह  रहा  हो । पर  मुकेश  ने  उस  झरने  पर  एक  सरसरी  नज़र  डाली  और  आगे  बढ़  गया ।

इस  समय  मुकेश  एक  हरे -भरे  गार्डेन  में  था ,  हजारों की  संख्या  में  मोर  अपना   पंख फ़ैलाये  नृत्य  कर  रहे  थे , चिड़ियाँ  उड़  रही  थी । मन को लुभाने  वाला  द्रश्य  था परन्तु, मुकेश  आगे  बढ़ता  ही  जा  रहा  था । अब  तक  मुकेश  न  जाने  कितने  किलोमीटर  उस गुफा  को  पार  कर  चूका  था  उसको  नही  पता  था ।लालटेन  की  बेटरी  भी  ख़तम  हो  चुकी  थी । मुकेश अपने साथ  एक  बैग  लाया  था , जिसे  उसने  अपनी  कमर  पर  लगा  रखा  था  उसमे  वह  छह  महीने  तक  का  इस्तेमाल  का  भरपूर  जरुरी  सामान  लाया  था । उसने  लालटेन  में    बेटरी  डाली, अपने  साथ  लाया  खाने  का  पकेट  खोला  आलू  की  सब्जी  के  साथ  दो  निवाले  बड़ी  मुश्किल  से  उसने  खाए ,पानी  पिया  और  और  आगे  बढ़  गया । क्रमश:


birds Orkut codes Teddy Bears Facebook scraps Myspace graphics birds scrapbook animations
चलते -चलते =  Kah  Do To Ek Kahani Hu,
                         Rakho To Ek Nishani Hu,
                         Jise Rok Na Payi Sari Duniya,
                         Bas Wohi Ek Bund Ankho Ka Pani Hu...


Sunday, July 1, 2012

''Devyani'' ek laghu katha




scraps

''Devyani''  
 
गेसूओ   को   खुला   छोड़कर   देवयानी   पार्थ   के  लिये   kitchen   में    नाशता   तैयार   करने  चली  गयी, 'केसरिया  भात'   के  लिए   चावलों को  धोते  हुए  देवयानी  बीते  कल  में  खो  गयी ।''वो  पुरे  दो  महीने  बाद  गाँव  से  लौटी  थी  , सब  कुछ  कितना  बदला -बदला  सा   लग रहा  है, कहाँ  वो  उत्तर  भारत  के  एक पहाडी   गाँव की  है । जहाँ  कल-कल  कर  बहती  हुई  गंगा  युवान  रूप  में   बहती  है  जिसका   अविरल  तेज     प्रवाह  देखते  ही   बनता   है, फूल  भी   ऐसे  हैं  की  हजारों  छोटे -छोटे  फूल  मिल  कर  के एक  बड़े  फूल  को  बनाते  हैं, शहरों   में  कितने   रंग  बिरंगे  फूलों   को  इकट्ठा   करते  हैं  हैं  तब  जाकर   कहीं  एक  गुलदस्ता  तैयार  होता  हैं, और  यहाँ  किसी  को  एक  फूल  देना  मतलब  पूरा  हज़ार  फूलों   का  एक  गुलदस्ता  देना!''
फ़ोन  की  बजती  हुई  घंटी  के  साथ  ही  देवयानी  की  तन्द्रा  भंग  हुई, फ़ोन  उसकी  सबसे  प्यारी  सहेली  रेनू  का  था ।दोनों  ने  घंटो  बात  की  इस  बीच  पार्थ  फैक्ट्री  के  लिए  जा  चुके  थे, और  देवयानी  को  खबर  भी   नहीं थी ! दोनों  सहेलियों की  बात  ''चल  फिर  सन्डे  को मिलते  हैं  बाय  टेक केयर ''के  साथ  ख़तम  हुई ।तब  कहीं  जाकर  सावित्री  ने  बताया  की  साहब  फैक्ट्री  के  लिए  चले  गए  हैं ।

देवयानी  अपने   कमरें   में चली  आई  के तभी  ''कौरिएर''की एक  आवाज़ आई देवयानी बहार गयी   ''कौरिएर'' लेने  ये  सोचती  हुई  की  किसका  है ? 'एक  बड़ा  प्यारा  सा  सुगन्धित  पिंक  कलर  का  लिफाफा'  था । उस पर  देवयानी  का  नाम  लिखा  था , किसका  होगा  ये  सोचते  हुए  उसने  लिफाफा  खोला  और  लिफाफा  उसके  हाथ  से  छूट  गया  सारे  शब्द  बिखर  गए सारा  कमरा   उसे  घूमता  हुआ  नज़र  आने  लगा वो  धम  से नीचे  बैठ  गयी ।

तभी  सावित्री  ने  आ कर  उससे  पूछा   ''मेमसाब   खाने में  क्या  बनेगा''  देवयानी  के  होंठो  से  बड़ी  मुश्किल  से  शब्द  निकले  '' जो  तेरी  मर्जी  हो  बना  ले '' देवयानी  किसी  तरह  भारी   कदमो  से  बाथरूम  में  गयी  और  वहां  पानी  का  नल  खोल  दिया  और  बहुत  तेज  -तेज  आवाज़  में  रोने  लगी  बीता  कल  उसके  सामने  इस  तरह  खड़ा  हो  जायेगा  उसने   कभी  सोचा  भी  नहीं  था । दीपंकर  और  देवयानी  स्कूल   से  लेकर  collage  में  साथ  ही  पढ़ते  थे , दोनों  में  दोस्ती  से  ज्यादा  कुछ  नहीं  था , वो तो  जब  दीपंकर  mba  करने  USA  गए  थे  तभी  एअरपोर्ट  में  देवयानी  को  कहकर  गए  थे  की '' देवयानी  मेरा  इंतज़ार  करना  में  लौट  तुम्ही को  अपना  जीवन साथी  बनाऊंगा '' और  देवयानी  ने  पुरे  पांच  सालो  का  लम्बा इंतज़ार  किया  था इन  पाच  सालो  में  दीपंकर  का  कभी  एक  फ़ोन  भी  नहीं  आया  था !!!फिर  पार्थ   उसको देखने  आये  और  देवयानी  ने  हाँ  कर  दी ।

देवयानी  की  आंखे  रोते-रोते  लाल  होकर  सूज  गयी  थी ,पर  अब  देवयानी  को  बहुत  अचछा  लग  रहा था ।फिर  उसने  एक  निर्णय  लिया  वो  बहार  आई  फिर  उसने  पार्थ  की  पसंद  की  साड़ी  निकली  हल्का  सा  मकेउप  किया  फिरी  candle  जलाई  और  पिंक  लिफाफे  को  जला  दिया ।
          
चलते-चलते= में कुछ मशहूर पंक्तियाँ

aazmaya  to  ishq  ne  hame  bahut
hum bhi dete rahe imthane ishq
par jab humne lena chaha sirf ek  imtha
to aap  khafa  ho  gaye ,..,..,

Khuda ne jab ishq banaya hoga,.,.,
To khud ajmaya hoga,.,.,
Hamari to aukaat hi kya hai,.,.,
Is ishq ne khuda ko bhi rulaya hoga,.,.,

  scrap for orkut

Friday, June 1, 2012

mano ya na mano aapke anmol pal ''aap bahut gandey ho''



 Good Morning Graphic #109
scrap orkut

                                                  ''aap bahut  gande  ho''
shelly  jaise  hi  class room  se  bahar  aayi,  usney  dekha  vahan  koi  nhi  tha. uski  saari  friends  ghar   chali  gayi   thi . shelly  ko  aaj  'Renu  mam'  ke  saath  'annual  function'  ki   taiyari  me  thodi  der  ho  gyi  thi . shelly  bike stand  ki  taraf  gyi,  apni  scooty  nikali  aur  ghar  ki  taraf  badha  di .school   aur  ghar  me  kafi  duri  hai, usko  raaste  me  aise  ilako  se  hokar  bhi  jana padta  hai jahan  chotey -chotey  bachchon  se  as a lebour  kaam  karaya jata  hai.

shelly  60 ki  raftaar se  ghar  ja  rhi thi. achanak  chiuk  kar  uski  scooty  ruk  gyi,  koi do  saal  ka  bachcha  achanak  uski  scooty  ke  saamne  aa gya  tha. renu  scooty  se  utari  usne  dekha  ki  koi  bhi  aas- pass  nahi  hai,  na  jane   vo bachcha  kahan  se  vahan  aa gya  tha ! renu  ne  bachchey  ki  maa  ko  bahut  dhunda,  par  vo  nahi  mili  toh  renu  ne  bachchey  ko  ek  ped   ki  chav  me  khada  kar  diya .
ghar   aaney   ke   baad   bhi  renu   ka   saara   dhyan  us  bachchey  par  hi  tha. maa   ne   renu   ko  soach  me  dubey   dekh  kar  puchcha  '' renu   kya   baat   hai   beta   jab  se  school  se  aayi  ho  gum  sum  ho ''? renu   ne   maa   ko   saari   baat   bta   di.fir   maa  ne  renu   ko  bahut  dukhi  dekh  kar  kaha   ki  chalo   vahan  jis   jagh  tumne  bachche   ko  khada   kiya  tha  usko  dekh kar  aate  hain . maa  aur  shelly   dono   vahan  pahuchay, vahan  koi  nahi  tha .

maa  aur   shelly  thoda  aagey  gye  vahan  unko  ek  bahut  bada  bangla  dikhayi  diya  unhone  dekha  ki , vahan  kuch  bachchey  cricket  khel  rhe  hain , aur  vo  jo  chota  sa  bachcha  jo  shelly  ki  scooty  ke  saamne  aa  gya  tha  sadak  par  se  daud  -daud  kar  ball  utha -utha  kar  cricket  kheltey  bachchon  ko  de  raha  tha ! aur  is  tarh  se  us  do  saal  ke  abodh  balak  ko  bhi  ball  uthane  ki  ''naukri''  mili  hui  thi  shelly  ke  muh  se  nikal   gya  aap  bahut  gande  ho !!

chaltey - chaltey =naa puchcho  is  zalim  zmane  ki 
                              darde dil  ke  siwa  yahan  kuch  naa  milega .....
                               ghar  se  chale  the  hum  to  khushi  ki  talash  me
                               log  milte  gye  karwan  banta  gya.....

Angel Graphic #84
                                

Tuesday, May 1, 2012

mano ya na mano apke anmol pal ''Lalita''

Free Orkut and MySpace Graphics Glitters scraps 
 

ललिता  ने 'जिमी' को  सेब   खिलाया   जिमी   ललिता  का पपी  है, जिसे  ललिता  बेहद  प्यार  करती  है । प्यारा  पपी  ललिता  की  सारी   बातें  समझता  था ।जिमी का धयान पड़ोस की आंटी रख रही थी । वो   रात बड़ी  काली  थी  ललिता   अपने माता- पिता  के   साथ  अपने  मामा  की  शादी  में  गयी  हुई  थी ।

उस  अंधियारी  काली  रात  का  फायदा  उठा  कर  कुछ  शैतान  लडको  ने  ललिता  के  बंद  घर  को  लूटने  का  प्लान  बना लिया ।पांच  लडको  का  गैंग  था,  सभी  लडको  के  चेहरे  मास्क  से  ढके  हुए  थे । जिमी  को  उन  लुटेरो  ने  नशीले  बिस्कुट  ड़ाल  दिए, जिमी  ने  बहुत  समझदारी  का  परिचय  दिया  उसने  उन   बिस्कुट  को  नहीं  खाया , और  सोने  की  एक्टिंग  करके  लेट  गया ।

लुटेरो  ने  घर  को  बहुत  अच्छी   तरह से  लूट  लिया । जब  वो  लुटेरे  जाने  लगे  तो  जिमी  ने  उनका  पीछा  किया , और  जहाँ  उन  लोगो  ने  लूट  का  पैसा  छुपाया  था  वो  जगह  देख कर  घर  वापस  आ  गया । ललिता  और  उसके  मम्मी- पापा  शादी  निपटा  कर  घर  आ  गए । घर  की  ऐसी  हालत  देख  कर  वो  बहुत  परेशान  हुए । तभी  जिमी  ने  ललिता  के  कपड़ो  को  खीचना  शुरू  कर  दिया ,ललिता   जिमी  के  साथ  चलने  लगी ।ललिता  के  पापा  को  लगा  की  जिमी  कुछ कहना  चाहता  है  ,वो  भी  जिमी  के  साथ  चलने  लगे । जिमी  एक  जंगल  में  जाकर  रुक  गया  । जिमी  ने  एक  जगह  पैरो  से  खोदना  शुरू  कर  दिया, ललिता  के  पापा  ने  खोद  कर  देखा  तो  वो  देखते  ही  रह  गए !! उनका  सारा  कीमती  सामान  वहां  था ।  उन्होंने  जिमी  को  बहुत  प्यार  किया  और  उसको  एक  बहुत  प्यारा  सा  छोटा  सा  घर  बनवा  कर  दिया  : )  
चलते- चलते  में  कुछ  मशहूर  पंक्तियाँ

 चलते-चलते = 
Usko chaha to bahut magar wo mila hi nahi
Lakh koshish ki magar faasla mita hi nahi
Usko zamane ne majboor is qadar kar diya
Ke meri kisi sada pe wo ruka hi nahi
Khuda se jholi phaila ke maanga tha usay
Khuda ne meri kisi dua ko suna hi nahi
Har aik se poocha sabab uske na milne ka
Har aik ne bataya ke wo mere liye bana hi nahi
Main tamaam umar ki koshish ke bawjood nakaam ho gaya
Aur wo usko mil gaya jis ne usay kabhi maanga hi nahi
Itni shiddat se chaha magar tu kisi aur ka ho gaya
Shayad is jahan mai wafa ka koi sila hi nahi…

orkut scrap




hello