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Friday, November 18, 2016




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                                                                   '' नीतिभा ''
दादी माँ नितिभा को कहानी सुना रही थी, वो भी तब, जब नीतिभा दादी के बहुत पीछे पड़ी थी कि प्लीज दादी कोई कहानी सुनाओ ना ।  तब दादी  गहरी सांस लेकर नीतिभा से बोली की आज मैं तुम्हे अपने बचपन की कहानी सुनाती हूँ, जो मेरी दादी मुझे सुनाती थी । 


दादी कहानी सुना रही हैं, और नीतिभा बड़े धयान से सुन रही है । धुरुवा रात के अंधेरे में जंगल की ओर बढे जा रही थी। वह  ज्यादा बड़ी नहीं थी, उसकी उम्र यही कोई सात या आठ बरस की रही होगी । धुरुवा जैसे -जैसे जंगल की ओर बढे जा रही थी, अँधेरा और घना होता जा रहा था। लेकिन धुरुवा को कोई भी डर नहीं लग रहा था क्यूंकि  उसकी सहेली अनन्या ने उसको बताया था की  घने जंगल के अंदर जो मंदिर  है उसमे अगर रात के  घने अंधरे में जाकर मन्नत मानगो तो वे अवश्य पूरी होती है । 

और  धुरुवा की बहुत सारी  विश थी- जैसे माँ ठीक हो जाये, दादी माँ के घुटनो का दर्द ठीक हो जाये, उसका राज्य शत्रुओ से मुक्त हो जाये, उसके राज्य में सब के पास धन- सम्पदा हो, उसकी सहेली अनन्या को वो सुनहरे बालो वाली , नीली आँखों वाली बड़ी सी गुड़िया मिल जाये, आदि -आदि। 


ना जाने क्यों दादी की आंखे गीली हो गयी थी। दादी ने अपनी गीली आँखों को पोछ कर बोलने के लिए मुह खोला ही था कि नीतिभा दादी के दोनों हाथों को अपने नन्हे- नन्हे हाथों में लेकर बोली, दादी क्या हुआ ? दादी नीतिभा को लाड लडाते हुए  बोली कुछ नहीं हुआ बेटा । फिर नीतिभा से बोली, चल आगे की कहानी सुन , धुरुवा को मंदिर दिखाई देने लगा था। मंदिर देखते ही उसके पैरों में बहुत ताकत आ गयी थी ।  वो भाग कर मंदिर के अंदर गयी , वहां देखा तो एक  सुन्दर सी स्त्री बाल खोले लाल रंग की साड़ी में भगवान् की आरती कर रही थी ।  धुरुवा भी वहाँ हाथ जोड़ कर खडी हो गयी। आरती समाप्त  होने के बाद  उस सुन्दर स्त्री ने धुरुवा को प्रसाद दिया और इतनी रात को उसके आने का कारण भी पूछा ? धुरुवा  ने  अपनी सभी विश बता दी , जिसे सुनकर उस सुन्दर  स्त्री ने धुरुवा के गालों पे बड़े प्यार से हाथ फेरा और बोली की भगवान्  बच्चों की विश जरूर पूरी करते हैं । और  तभी घडी का अलार्म बहुत तेज-तेज बजने लगा , धुरुवा! धुरुवा!  माँ जोर - जोर से चिलाते हुए धुरवा के कमरे में आयी, धुरुवा ने आंखे खोल कर देखा तो वो अपने बेड पर थी। ..... 


दादी , ने अपनी कहानी ख़तम करके देखा तो नीतिभा गहरी नींद में सोई हुई थी ।  दादी भी नीतिभा की बगल में लेट कर सो गयी । 
चलते - चलते =
कोई जगा  ना देना मुझको मेरी इन जादू भरे सपनो से 
सोने दो मुझे सोने दो और खोने दो मुझे इन मीठे-मीठे सपनो में।  ....... "

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