Tuesday, January 1, 2013
''aarya''

''आर्या''
आर्या बालकनी में खड़ी थी, आती हुई गुलाब की खुशबू आर्या को बीते कल की गलियों में ले गयी ।उस दिन आर्या ने अपनी पसंद का बिलकुल खिलते गुलाब के रंग का ड्रेस पहना था, तब आर्या सिर्फ अपने में ही गुम रहती थी ।सुंदर -सुंदर कपडे पहनना और ''बाळ पुस्तको '' में खोये रहना बस यही उसकी जिंदगी थी ।'माँ ' तभी बहार से आती रोहित की आवाज़ ने मानो आर्या को मीठी नींद से जगा दिया हो, पूरा साहस इकठ्ठा करके आर्या बोली 'हाँ बेटा m here' रोहित चट से आकर माँ से लिपट गया और बोला 'love you mom, you are great mom in the whole world' 'o मेरा बच्चा '
तभी घनघनाती मोबाइल फ़ोन की घंटी बज उठी,आर्या ने देखा तो फ़ोन उसकी माँ का था।'हाँ माँ कैसी हो' ? '' में तो ठीक हु '' '' तू अपनी सुना '' '' सुना है रोहित बोर्डिंग से घर आया हुआ है ''।'हाँ माँ', तो ''रोहित को लेकर यहाँ क्यूँ नहीं आ जाती '' 'नहीं माँ अभी तो आना संभव नहीं हो पायेगा ,रोहित के पापा ने हिल स्टेशन का प्रोग्राम बना लिया है ' '' ठीक है ,तो आ जाती रोहित को लेकर तो मुझे और तेरे पापा को अच्छा लगता, चल बच्चे खुश रहे तो उसी में ही बड़ो की ख़ुशी है ,अपना, रोहित का और दामादजी का धयान रखना ...रखती हु ''
रोहित तब तक बहार खेले जा चूका था । आर्या अपने बालो को कंघी करने के लिए 'ड्रेसिंग टेबल' पर आई, और बालो को काढते -काढते फिर से अपनी दुनिया में खो गयी ......उस दिन अपनी गुलाब के रंग की ड्रेस पहन कर आर्य जैसे ही बहार हॉल में आई उसे मनु और उसका भाई अभिनव दीखाई दिया , अभिनव गहरे नीले रंग के कोट में किसी फ़िल्मी हीरो से कम नहीं लग रहा था, जहाँ आर्या अभिनव को देख कर मन्त्र मुग्ध हो गयी थी , वहीँ अभिनव भी आर्या को देख कर अपना सब कुछ भूल बैठा था ।
मनु आर्या की बचपन की सहेली थी, अभिनव ने मनु से कहा की मैं 'चलता हु' तो मनु बोली भैया बस पाच मिनट में मैं भी चलती हु । और उन पाच मिनटों में मनु ने आर्या से क्या कहा , आर्या को कुछ भी याद नहीं !!
मानस के घर आने का टाइम हो गया था , तभी पोर्च में कार के रुकने की आवाज़ सुनाई दी ।मानस ने घर में घुसते ही आर्या से पूछा पैकिंग हो गयी? बस अभी डिनर के बाद करती हु, ज्यादा टाइम नहीं लगेगा ।
अगले दिन रात को आर्य अपनी फॅमिली के साथ हिमाचल के हिल स्टेशन पर थी ।जब आर्या अपने पति और बच्चे के साथ होटल के रूम में जा रही थी, तो वहीँ कोरिडोर में अभिनव से सामना हो गया ! आर्या स्तब्ध सी रह गयी , नज़रें झुक कर या यु कहिये की चुप कर अपने रूम में पहुची ।आर्या को लगा की अभिनव भी उससे बचना चाहते हैं।अभिनव के साथ उसकी वाइफ रूही भी थी , दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही है ,आर्या ने सोचा ।
मानस के घर आने का टाइम हो गया था , तभी पोर्च में कार के रुकने की आवाज़ सुनाई दी ।मानस ने घर में घुसते ही आर्या से पूछा पैकिंग हो गयी? बस अभी डिनर के बाद करती हु, ज्यादा टाइम नहीं लगेगा ।
अगले दिन रात को आर्य अपनी फॅमिली के साथ हिमाचल के हिल स्टेशन पर थी ।जब आर्या अपने पति और बच्चे के साथ होटल के रूम में जा रही थी, तो वहीँ कोरिडोर में अभिनव से सामना हो गया ! आर्या स्तब्ध सी रह गयी , नज़रें झुक कर या यु कहिये की चुप कर अपने रूम में पहुची ।आर्या को लगा की अभिनव भी उससे बचना चाहते हैं।अभिनव के साथ उसकी वाइफ रूही भी थी , दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही है ,आर्या ने सोचा ।
आर्या को घुमने का ज़बरदस्त शौक है ,मानस तो एक बैंच पर बैठ गए की तुम लोग घूम लो ! रोहित वहीँ के विडियो पार्लर में चला गया, अब तीन - चार घंटे को तो उसे कोई होश नहीं रहेगा । आर्या अकेले ही आगे बढ़ने लगी , थोडा आगे जाने पर उसे अभिनव दीखाई दिए ,रूही उनके साथ नहीं थी !अभिनव आर्या के पास ए और बोले ''कैसी हो''? आर्या के मुह से कोई भी बोल नहीं फुटा तो अभिनव स्वयम ही बोलते चले गए और आर्या से पूछ बैठे ''तुमने मेरा इंतज़ार क्यूँ नहीं किया'' उत्तर में आर्या की रुलाई फुट गयी ।और बस इतना ही बोल पाई की हम दोनों के लिए यही ठीक था ,और भरे कदमो से मानस के पास लौट चली आर्या ।
चलते -चलते में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
चलते -चलते =
With this passing year,
lose the pains and keep the memories.
May you always shower a smiling face,
in years to come.
I wish you a very Happy New Year.2013

Wednesday, August 1, 2012
andhiyari raat (1)(STORY)

मुकेश अपने हाथ में लालटेन लिए हुए उस अँधेरी गहरी सुरंग में आगे बढता चला गया | आज वह अपना अधुरा काम पूरा करना चाहता था, यह सुरंग उसके सात पीढ़ी में कोई भी पार नही कर पाया था !! कोई भी नही जनता था की ये सुरंग आखिर जाती कहाँ पर है? मुकेश ने एक गहरी लम्बी सांस ली और मज़बूत इरादे के साथ उस गहरी लम्बी सुरंग में बढ़ता चला गया ।मुकेश को ऐसा लग रहा था, जैसे उसके पैरों के नीचे किसी ने मखमली कालीन बिछा दिया हो । लालटेन को तनिक नीचे झुकाकर ज्यू ही मुकेश ने देखा तो वो देखता ही रह गया ! रेड कलर का कारपेट बिछा हुआ था !मुकेश संभल-संभल कर आगे बढ़ता जा रहा था । कुछ आगे जाने पर उसे किसी झरने के गिरने की आवाज़ सुने दी, सुरंग की एक साइड में 'सुनहरे पानी का एक वाटर फाल ' था ऐसा लग रहा था की मानो पिघला हुआ 'सोना' बह रहा हो । पर मुकेश ने उस झरने पर एक सरसरी नज़र डाली और आगे बढ़ गया ।
इस समय मुकेश एक हरे -भरे गार्डेन में था , हजारों की संख्या में मोर अपना पंख फ़ैलाये नृत्य कर रहे थे , चिड़ियाँ उड़ रही थी । मन को लुभाने वाला द्रश्य था परन्तु, मुकेश आगे बढ़ता ही जा रहा था । अब तक मुकेश न जाने कितने किलोमीटर उस गुफा को पार कर चूका था उसको नही पता था ।लालटेन की बेटरी भी ख़तम हो चुकी थी । मुकेश अपने साथ एक बैग लाया था , जिसे उसने अपनी कमर पर लगा रखा था उसमे वह छह महीने तक का इस्तेमाल का भरपूर जरुरी सामान लाया था । उसने लालटेन में बेटरी डाली, अपने साथ लाया खाने का पकेट खोला आलू की सब्जी के साथ दो निवाले बड़ी मुश्किल से उसने खाए ,पानी पिया और और आगे बढ़ गया । क्रमश:

चलते -चलते = Kah Do To Ek Kahani Hu,
Rakho To Ek Nishani Hu,
Jise Rok Na Payi Sari Duniya,
Bas Wohi Ek Bund Ankho Ka Pani Hu...
Sunday, July 1, 2012
''Devyani'' ek laghu katha

''Devyani''
फ़ोन की बजती हुई घंटी के साथ ही देवयानी की तन्द्रा भंग हुई, फ़ोन उसकी सबसे प्यारी सहेली रेनू का था ।दोनों ने घंटो बात की इस बीच पार्थ फैक्ट्री के लिए जा चुके थे, और देवयानी को खबर भी नहीं थी ! दोनों सहेलियों की बात ''चल फिर सन्डे को मिलते हैं बाय टेक केयर ''के साथ ख़तम हुई ।तब कहीं जाकर सावित्री ने बताया की साहब फैक्ट्री के लिए चले गए हैं ।
देवयानी अपने कमरें में चली आई के तभी ''कौरिएर''की एक आवाज़ आई देवयानी बहार गयी ''कौरिएर'' लेने ये सोचती हुई की किसका है ? 'एक बड़ा प्यारा सा सुगन्धित पिंक कलर का लिफाफा' था । उस पर देवयानी का नाम लिखा था , किसका होगा ये सोचते हुए उसने लिफाफा खोला और लिफाफा उसके हाथ से छूट गया सारे शब्द बिखर गए सारा कमरा उसे घूमता हुआ नज़र आने लगा वो धम से नीचे बैठ गयी ।
तभी सावित्री ने आ कर उससे पूछा ''मेमसाब खाने में क्या बनेगा'' देवयानी के होंठो से बड़ी मुश्किल से शब्द निकले '' जो तेरी मर्जी हो बना ले '' देवयानी किसी तरह भारी कदमो से बाथरूम में गयी और वहां पानी का नल खोल दिया और बहुत तेज -तेज आवाज़ में रोने लगी बीता कल उसके सामने इस तरह खड़ा हो जायेगा उसने कभी सोचा भी नहीं था । दीपंकर और देवयानी स्कूल से लेकर collage में साथ ही पढ़ते थे , दोनों में दोस्ती से ज्यादा कुछ नहीं था , वो तो जब दीपंकर mba करने USA गए थे तभी एअरपोर्ट में देवयानी को कहकर गए थे की '' देवयानी मेरा इंतज़ार करना में लौट तुम्ही को अपना जीवन साथी बनाऊंगा '' और देवयानी ने पुरे पांच सालो का लम्बा इंतज़ार किया था इन पाच सालो में दीपंकर का कभी एक फ़ोन भी नहीं आया था !!!फिर पार्थ उसको देखने आये और देवयानी ने हाँ कर दी ।
देवयानी की आंखे रोते-रोते लाल होकर सूज गयी थी ,पर अब देवयानी को बहुत अचछा लग रहा था ।फिर उसने एक निर्णय लिया वो बहार आई फिर उसने पार्थ की पसंद की साड़ी निकली हल्का सा मकेउप किया फिरी candle जलाई और पिंक लिफाफे को जला दिया ।
चलते-चलते= में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
aazmaya to ishq ne hame bahut
hum bhi dete rahe imthane ishq
par jab humne lena chaha sirf ek imtha
to aap khafa ho gaye ,..,..,
Khuda ne jab ishq banaya hoga,.,.,
To khud ajmaya hoga,.,.,
Hamari to aukaat hi kya hai,.,.,
Is ishq ne khuda ko bhi rulaya hoga,.,.,
देवयानी अपने कमरें में चली आई के तभी ''कौरिएर''की एक आवाज़ आई देवयानी बहार गयी ''कौरिएर'' लेने ये सोचती हुई की किसका है ? 'एक बड़ा प्यारा सा सुगन्धित पिंक कलर का लिफाफा' था । उस पर देवयानी का नाम लिखा था , किसका होगा ये सोचते हुए उसने लिफाफा खोला और लिफाफा उसके हाथ से छूट गया सारे शब्द बिखर गए सारा कमरा उसे घूमता हुआ नज़र आने लगा वो धम से नीचे बैठ गयी ।
तभी सावित्री ने आ कर उससे पूछा ''मेमसाब खाने में क्या बनेगा'' देवयानी के होंठो से बड़ी मुश्किल से शब्द निकले '' जो तेरी मर्जी हो बना ले '' देवयानी किसी तरह भारी कदमो से बाथरूम में गयी और वहां पानी का नल खोल दिया और बहुत तेज -तेज आवाज़ में रोने लगी बीता कल उसके सामने इस तरह खड़ा हो जायेगा उसने कभी सोचा भी नहीं था । दीपंकर और देवयानी स्कूल से लेकर collage में साथ ही पढ़ते थे , दोनों में दोस्ती से ज्यादा कुछ नहीं था , वो तो जब दीपंकर mba करने USA गए थे तभी एअरपोर्ट में देवयानी को कहकर गए थे की '' देवयानी मेरा इंतज़ार करना में लौट तुम्ही को अपना जीवन साथी बनाऊंगा '' और देवयानी ने पुरे पांच सालो का लम्बा इंतज़ार किया था इन पाच सालो में दीपंकर का कभी एक फ़ोन भी नहीं आया था !!!फिर पार्थ उसको देखने आये और देवयानी ने हाँ कर दी ।
देवयानी की आंखे रोते-रोते लाल होकर सूज गयी थी ,पर अब देवयानी को बहुत अचछा लग रहा था ।फिर उसने एक निर्णय लिया वो बहार आई फिर उसने पार्थ की पसंद की साड़ी निकली हल्का सा मकेउप किया फिरी candle जलाई और पिंक लिफाफे को जला दिया ।
चलते-चलते= में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
aazmaya to ishq ne hame bahut
hum bhi dete rahe imthane ishq
par jab humne lena chaha sirf ek imtha
to aap khafa ho gaye ,..,..,
Khuda ne jab ishq banaya hoga,.,.,
To khud ajmaya hoga,.,.,
Hamari to aukaat hi kya hai,.,.,
Is ishq ne khuda ko bhi rulaya hoga,.,.,
Friday, June 1, 2012
mano ya na mano aapke anmol pal ''aap bahut gandey ho''

shelly jaise hi class room se bahar aayi, usney dekha vahan koi nhi tha. uski saari friends ghar chali gayi thi . shelly ko aaj 'Renu mam' ke saath 'annual function' ki taiyari me thodi der ho gyi thi . shelly bike stand ki taraf gyi, apni scooty nikali aur ghar ki taraf badha di .school aur ghar me kafi duri hai, usko raaste me aise ilako se hokar bhi jana padta hai jahan chotey -chotey bachchon se as a lebour kaam karaya jata hai.
shelly 60 ki raftaar se ghar ja rhi thi. achanak chiuk kar uski scooty ruk gyi, koi do saal ka bachcha achanak uski scooty ke saamne aa gya tha. renu scooty se utari usne dekha ki koi bhi aas- pass nahi hai, na jane vo bachcha kahan se vahan aa gya tha ! renu ne bachchey ki maa ko bahut dhunda, par vo nahi mili toh renu ne bachchey ko ek ped ki chav me khada kar diya .
ghar aaney ke baad bhi renu ka saara dhyan us bachchey par hi tha. maa ne renu ko soach me dubey dekh kar puchcha '' renu kya baat hai beta jab se school se aayi ho gum sum ho ''? renu ne maa ko saari baat bta di.fir maa ne renu ko bahut dukhi dekh kar kaha ki chalo vahan jis jagh tumne bachche ko khada kiya tha usko dekh kar aate hain . maa aur shelly dono vahan pahuchay, vahan koi nahi tha .
maa aur shelly thoda aagey gye vahan unko ek bahut bada bangla dikhayi diya unhone dekha ki , vahan kuch bachchey cricket khel rhe hain , aur vo jo chota sa bachcha jo shelly ki scooty ke saamne aa gya tha sadak par se daud -daud kar ball utha -utha kar cricket kheltey bachchon ko de raha tha ! aur is tarh se us do saal ke abodh balak ko bhi ball uthane ki ''naukri'' mili hui thi shelly ke muh se nikal gya aap bahut gande ho !!
chaltey - chaltey =naa puchcho is zalim zmane ki
darde dil ke siwa yahan kuch naa milega .....
ghar se chale the hum to khushi ki talash me
log milte gye karwan banta gya.....
maa aur shelly thoda aagey gye vahan unko ek bahut bada bangla dikhayi diya unhone dekha ki , vahan kuch bachchey cricket khel rhe hain , aur vo jo chota sa bachcha jo shelly ki scooty ke saamne aa gya tha sadak par se daud -daud kar ball utha -utha kar cricket kheltey bachchon ko de raha tha ! aur is tarh se us do saal ke abodh balak ko bhi ball uthane ki ''naukri'' mili hui thi shelly ke muh se nikal gya aap bahut gande ho !!
chaltey - chaltey =naa puchcho is zalim zmane ki
darde dil ke siwa yahan kuch naa milega .....
ghar se chale the hum to khushi ki talash me
log milte gye karwan banta gya.....

Tuesday, May 1, 2012
mano ya na mano apke anmol pal ''Lalita''
ललिता ने 'जिमी' को सेब खिलाया जिमी ललिता का पपी है, जिसे ललिता बेहद प्यार करती है । प्यारा पपी ललिता की सारी बातें समझता था ।जिमी का धयान पड़ोस की आंटी रख रही थी । वो रात बड़ी काली थी ललिता अपने माता- पिता के साथ अपने मामा की शादी में गयी हुई थी ।
उस अंधियारी काली रात का फायदा उठा कर कुछ शैतान लडको ने ललिता के बंद घर को लूटने का प्लान बना लिया ।पांच लडको का गैंग था, सभी लडको के चेहरे मास्क से ढके हुए थे । जिमी को उन लुटेरो ने नशीले बिस्कुट ड़ाल दिए, जिमी ने बहुत समझदारी का परिचय दिया उसने उन बिस्कुट को नहीं खाया , और सोने की एक्टिंग करके लेट गया ।
लुटेरो ने घर को बहुत अच्छी तरह से लूट लिया । जब वो लुटेरे जाने लगे तो जिमी ने उनका पीछा किया , और जहाँ उन लोगो ने लूट का पैसा छुपाया था वो जगह देख कर घर वापस आ गया । ललिता और उसके मम्मी- पापा शादी निपटा कर घर आ गए । घर की ऐसी हालत देख कर वो बहुत परेशान हुए । तभी जिमी ने ललिता के कपड़ो को खीचना शुरू कर दिया ,ललिता जिमी के साथ चलने लगी ।ललिता के पापा को लगा की जिमी कुछ कहना चाहता है ,वो भी जिमी के साथ चलने लगे । जिमी एक जंगल में जाकर रुक गया । जिमी ने एक जगह पैरो से खोदना शुरू कर दिया, ललिता के पापा ने खोद कर देखा तो वो देखते ही रह गए !! उनका सारा कीमती सामान वहां था । उन्होंने जिमी को बहुत प्यार किया और उसको एक बहुत प्यारा सा छोटा सा घर बनवा कर दिया : )
चलते- चलते में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
चलते-चलते =
Usko chaha to bahut magar wo mila hi nahi
Lakh koshish ki magar faasla mita hi nahi
Usko zamane ne majboor is qadar kar diya
Ke meri kisi sada pe wo ruka hi nahi
Khuda se jholi phaila ke maanga tha usay
Khuda ne meri kisi dua ko suna hi nahi
Har aik se poocha sabab uske na milne ka
Har aik ne bataya ke wo mere liye bana hi nahi
Main tamaam umar ki koshish ke bawjood nakaam ho gaya
Aur wo usko mil gaya jis ne usay kabhi maanga hi nahi
Itni shiddat se chaha magar tu kisi aur ka ho gaya
Shayad is jahan mai wafa ka koi sila hi nahi…

उस अंधियारी काली रात का फायदा उठा कर कुछ शैतान लडको ने ललिता के बंद घर को लूटने का प्लान बना लिया ।पांच लडको का गैंग था, सभी लडको के चेहरे मास्क से ढके हुए थे । जिमी को उन लुटेरो ने नशीले बिस्कुट ड़ाल दिए, जिमी ने बहुत समझदारी का परिचय दिया उसने उन बिस्कुट को नहीं खाया , और सोने की एक्टिंग करके लेट गया ।
लुटेरो ने घर को बहुत अच्छी तरह से लूट लिया । जब वो लुटेरे जाने लगे तो जिमी ने उनका पीछा किया , और जहाँ उन लोगो ने लूट का पैसा छुपाया था वो जगह देख कर घर वापस आ गया । ललिता और उसके मम्मी- पापा शादी निपटा कर घर आ गए । घर की ऐसी हालत देख कर वो बहुत परेशान हुए । तभी जिमी ने ललिता के कपड़ो को खीचना शुरू कर दिया ,ललिता जिमी के साथ चलने लगी ।ललिता के पापा को लगा की जिमी कुछ कहना चाहता है ,वो भी जिमी के साथ चलने लगे । जिमी एक जंगल में जाकर रुक गया । जिमी ने एक जगह पैरो से खोदना शुरू कर दिया, ललिता के पापा ने खोद कर देखा तो वो देखते ही रह गए !! उनका सारा कीमती सामान वहां था । उन्होंने जिमी को बहुत प्यार किया और उसको एक बहुत प्यारा सा छोटा सा घर बनवा कर दिया : )
चलते- चलते में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
चलते-चलते =
Usko chaha to bahut magar wo mila hi nahi
Lakh koshish ki magar faasla mita hi nahi
Usko zamane ne majboor is qadar kar diya
Ke meri kisi sada pe wo ruka hi nahi
Khuda se jholi phaila ke maanga tha usay
Khuda ne meri kisi dua ko suna hi nahi
Har aik se poocha sabab uske na milne ka
Har aik ne bataya ke wo mere liye bana hi nahi
Main tamaam umar ki koshish ke bawjood nakaam ho gaya
Aur wo usko mil gaya jis ne usay kabhi maanga hi nahi
Itni shiddat se chaha magar tu kisi aur ka ho gaya
Shayad is jahan mai wafa ka koi sila hi nahi…

Sunday, April 1, 2012
mano ya na mano aapke anmol pal ''sunaina''

'' सुनयना''
ये अपनी स्टोरी जिसने मुझे बताई है उन्होने मुझे अपना नाम लिखने के लिए मना कर दिया है ।
यह बात उन दिनों की है जब सुनयना 12th standard में आई थी, तब उनमे बहुत बचपना था ।वो जिंदगी को एक ''फ़िल्मी दुनिया'' से जोड़ कर देखती थी !! सुनयना की माँ ने उनको बहुत बार समझाया था की, यथार्थ में जिया करो, पर तब उनको ये बात पल्ले नहीं पड़ती थी ।
शायद उनको समझाने के लिए 'नियति' ने दूसरा कोई रास्ता सोच रखा था !!! स्कूल से आते - जाते कब sonu उनको और वह sonu को like करने लगी पता ही नही चला । सोनू हमेशा उनको दूसरी दुनिया में ले चलने की बात करता रहता था ।सुनयना इतनी समझदार होते हुए भी एक दिन सोनू की बातों में आ गयी, और अपना सुनहरा आज और कल छोड़कर और अपने देवतातुल्य माता -पिता को छोड़कर सोनू के साथ दूसरी दुनिया में जाने को तैयार हो गयी ।
और एक रात सुनयना अपना सब कुछ छोड़कर .....................!!
बहुत देर तक सुनयना ने सोनू का इंतज़ार किया,पर सोनू को न आना था नाहीं वो आया ! क्यूंकि उसको कोई दूसरी लड़की मिल गयी थी,सुनयना को बाद में पता चला की सोनू का यही काम है !भोली -भली मासूम लड़कियों के ज़ज्बात से खेलना :'( और उस दिन के बाद सुनयना ने''ph.d '' की और आज एक 'प्रसिद्ध विश्वविध्यालय' में लेकचरार हैं उनका भरा -पूरा परिवार है ।'' उन्होने ये बात मुझे इस लिए बताई ताकि आज की भावी पीढ़ी उनके इस अनुभव से सबक ले सके ''
चलते =चलते = दिल तडपता रहा और वो जाने लगे.....
संग गुज़रे जमाने याद आने लगे .......
उनकी बेवफाई कुछ इस कदर काम आई .....
आज अपनों के साथ हम मुस्कराने लगे ......!!
और एक रात सुनयना अपना सब कुछ छोड़कर .....................!!
बहुत देर तक सुनयना ने सोनू का इंतज़ार किया,पर सोनू को न आना था नाहीं वो आया ! क्यूंकि उसको कोई दूसरी लड़की मिल गयी थी,सुनयना को बाद में पता चला की सोनू का यही काम है !भोली -भली मासूम लड़कियों के ज़ज्बात से खेलना :'( और उस दिन के बाद सुनयना ने''ph.d '' की और आज एक 'प्रसिद्ध विश्वविध्यालय' में लेकचरार हैं उनका भरा -पूरा परिवार है ।'' उन्होने ये बात मुझे इस लिए बताई ताकि आज की भावी पीढ़ी उनके इस अनुभव से सबक ले सके ''
चलते =चलते = दिल तडपता रहा और वो जाने लगे.....
संग गुज़रे जमाने याद आने लगे .......
उनकी बेवफाई कुछ इस कदर काम आई .....
आज अपनों के साथ हम मुस्कराने लगे ......!!
Thursday, March 1, 2012
mano ya na mano ''mera sapna'' vishal

''विशाल''
छत्त पर खड़ी निर्मला ने सामने फैले हुएय विशाल जंगल को देखा, उनके पति फोरेस्ट ऑफिसर हैं । निर्मला नागपुर के जंगलो में रहती है , वहां बारहों महीने जीरों डीग्री तापमान रहता है , सूरज कभी दिखाई नही देता ,क्युकी जंगल बेहद घना है । निर्मला यहाँ अकेले ही रहते है , उसके दोनों बच्चे सौरभ और गौरव दिल्ली के एक हॉस्टल में रहते हैं ,दोनों अभी छोटी क्लास में पढते हैं । आज सुबह से ही निर्मला को उन दोनों की बहुत याद आ रही थी कारण था की , आज सौरभ का बर्थडे था ।
तभी विशाल की म्रदु आवाज़ आई ''निर्मला'' निर्मला की तन्द्रा भंग हुई, वह यथार्थ में लौट आई । धीरे -धीरे थके कदमो से निर्मला नीचे आई , देखा आज विशाल अपने नीले सूट में बेहद खुबसूरत लग रहे थे , कुछ पालो के लिए तो निर्मला मानो सब कुछ ही भूल गयी थी । विशाल निर्मला के मन के भावो को समझ रहे थे , उन्होने आगे बढ़ कर निर्मला को अपने हिरदय से लगा लिया ।
विशाल शहर से एक बेहद खुबसूरत ''गिटार की शेप'' केक बनवा कर लाये थे , दोनों ने मिलकर केक काटा दोनों की आंखे ख़ुशी के आंसुओ से भरी हुई थी । तभी बहार से विशाल की आवाज़ आई मोम -डैड .......!! और निर्मला की नींद खुल गयी ।
चलते- चलते = भीगी- भीगी सी अलसाई सुबह ने जैसे कानो में कुछ कहा
हवा का झोंका आया और मेरे केशो को उड़ाकर मुख पर डाला
ऐसे की जैसे लहराता सा आँचल हो उठकर झरोखे से नज़र डाली जो
उस पार पारिजात के पुष्पों की सुगंध ने आ घेरा, होले से जो दर्पण निहारा
तो स्तब्ध रह गयी ,उनका चेहरा जो नज़र आ गया वही भोला सा मासूम.....
कई सवालों को लिए अपनी निसंदेह पवित्र मुस्कान के साथ जो मेरी औरा को
तृप्त कर रहा था .......और ये सपना ही था .................!

Wednesday, February 1, 2012
mano ya na mano ''mera sapna'' sonali
सोनाली , नई भाभी ने अपनी रस टपकती वाणी में कहा, सोनाली गहरी नींद में सोयी थी, पर नयी भाभी की एक आवाज़ पर ही उठ कर खड़ी हो गयी । भाभी बोली सोनाली तुम मुझे ''कच्ची इमली'' लाकर दोगी ? हाँ भाभी मुझे पेड़ पर से इमली तोडनी आती है, भाभी बोली नहीं तोडनी नही है ।तो !! सोनाली बोली ?? सोनाली को पैसे देते हुएय भाभी बोली, वो जो बच्चे पेड़ के नीचे टोकरी में इमली लिए बैठे रहते हैं न, उनसे ले आओ । अच्छा भाभी कहती हुई गीतिका उछलती हुई बहार की तरफ भाग गयी ।
मगर आज पेड़ के नीचे एक भी इमली वाला नहीं था । सोनाली ने छोटे- छोटे पत्थर उठाये और इमली पर साध- साध कर निशाना लगाने लगी, उसने ढेर सारी इमली जमीन पर गिरा दी, फिर अपनी फ्राक में सारी इमली इकठी कर ली । भाभी के दिए हुएय पैसे बच गए थे , वो बहुत दिन से ''सकोरे में लाल रसगुल्ला '' खाने का सोच रही थी, पर अम्मा के दिए सारे पैसे उसने चाट-पकोड़ी में उड़ा दिए थे । ''जय प्रकाश हलवाई'' के यहाँ से उसने दो रसगुल्ले लिए एक अपने लिए एक अपनी नयी भाभी के लिए ।
एक हाथ से उसने अपनी फ्राक को पकड़ रखा और दुसरे हाथ में सकोरा पकड़ रखा था । घर पर लेकर आई तो देखा भाभी भैया के साथ बहार जाने के लिए सज- धज कर खड़ी हैं ।भाभी इतनी सुंदर लग रही थी की , सोनाली अपलक दृष्टि से भाभी को देखती रही ।फिर अचानक उसे जैसे कुछ ध्यान आया हो ,मानो वो किसी सपने को देख कर जागी हो । सोनाली बोली भाभी, इमली और रसगुल्ले भाभी ने अपने दोनों फूल जैसे हाथ आगे बढाये और बहार गाड़ी की चरमराती आवाज़ सुनाई दी और .............सोनाली की आँख खुल गयी ......!
चलते-चलते = वो कागज़ की कश्ती,वो जादू की नाव
वो आँगन का झरोखा,वो बहता सा गाव
वो अम्मा की साडी,वो बापू की छाँव
'' कोई लौटा दे वो मेरा बीता सा कल'' ।।
चलते-चलते = वो कागज़ की कश्ती,वो जादू की नाव
वो आँगन का झरोखा,वो बहता सा गाव
वो अम्मा की साडी,वो बापू की छाँव
'' कोई लौटा दे वो मेरा बीता सा कल'' ।।
Sunday, January 15, 2012
mano ya na mano ''mera sapna'' BABLOO
''बबलू''
बबलू भाग कर अपनी दादी के पल्लू में छुप गया, माँ उसके पीछे डंडा लेकर भाग रही थी | शैतानी भी तो बबलू खूब करता था |अपनी मम्मी की सारी 'लिपस्टिक' तोड़ आया था, मम्मी को अभी ही,क्लब जाना था , दूसरी लिपस्टिक लाने का टाइम भी नही था, वो लिपस्टिक साड़ी के साथ की मचिंग की थी | मम्मी दादी से बोली आज आप बबलू को छोड़ दो, आज ये मेरे हाथ से नही बचने वाला | और बबलू को मारते वक़्त दादी के भी दो- चार डंडे लग गये थे ....... : p
बबलू भाग कर अपनी दादी के पल्लू में छुप गया, माँ उसके पीछे डंडा लेकर भाग रही थी | शैतानी भी तो बबलू खूब करता था |अपनी मम्मी की सारी 'लिपस्टिक' तोड़ आया था, मम्मी को अभी ही,क्लब जाना था , दूसरी लिपस्टिक लाने का टाइम भी नही था, वो लिपस्टिक साड़ी के साथ की मचिंग की थी | मम्मी दादी से बोली आज आप बबलू को छोड़ दो, आज ये मेरे हाथ से नही बचने वाला | और बबलू को मारते वक़्त दादी के भी दो- चार डंडे लग गये थे ....... : p
पर दादी मम्मी को अपनी 'बेटी' से भी ज्यादा प्यार करती थी :) बबलू ने 'कान' पकडे और कभी भी
मेकअप के सामान को हाथ नहीं लगाऊंगा,ऐसा कह कर बबलू रोता हुआ बहार भाग गया | तभी बबलू ने देखा की ''रामलीला'' के आर्टिस्ट आज के शो की प्रक्टिस कर रहे थे | बबलू बहुत देर तक उनको देखता रहा, और बडे होकर मै ''रावण'' बनूगा ये सोच कर घर चला आया : D
मम्मी से बबलू बोला ''मम्मी मै बडे होकर रावण जैसा बनूगा'' मम्मी ने बबलू के 'दो चपत' लगा दी और बोली ''न जाने कहाँ से ये सब सीख कर आता है'' बबलू रोने लगा और रोते -रोते बोला अब आपसे कभी बात नहीं करूँगा | मगर थोड़ी देर में ही ,आकर बोला मम्मी पतंग लाने के लिए पैसे दो न ......पतंग लेकर बबलू छत्त पर चला गया......और पतंग लुटने के चक्कर में ........इतनी में बबलू की आंखे खुल गयी वो बेड के नीचे था .....!:)
चलते-चलते = अब तो रात के पल भी हसीं नज़र आते हैं
हमे तो अब बिस्तर के नीचे भी सितारे नज़र आते हैं ||:)
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