
'' सुनयना''
ये अपनी स्टोरी जिसने मुझे बताई है उन्होने मुझे अपना नाम लिखने के लिए मना कर दिया है ।
यह बात उन दिनों की है जब सुनयना 12th standard में आई थी, तब उनमे बहुत बचपना था ।वो जिंदगी को एक ''फ़िल्मी दुनिया'' से जोड़ कर देखती थी !! सुनयना की माँ ने उनको बहुत बार समझाया था की, यथार्थ में जिया करो, पर तब उनको ये बात पल्ले नहीं पड़ती थी ।
शायद उनको समझाने के लिए 'नियति' ने दूसरा कोई रास्ता सोच रखा था !!! स्कूल से आते - जाते कब sonu उनको और वह sonu को like करने लगी पता ही नही चला । सोनू हमेशा उनको दूसरी दुनिया में ले चलने की बात करता रहता था ।सुनयना इतनी समझदार होते हुए भी एक दिन सोनू की बातों में आ गयी, और अपना सुनहरा आज और कल छोड़कर और अपने देवतातुल्य माता -पिता को छोड़कर सोनू के साथ दूसरी दुनिया में जाने को तैयार हो गयी ।
और एक रात सुनयना अपना सब कुछ छोड़कर .....................!!
बहुत देर तक सुनयना ने सोनू का इंतज़ार किया,पर सोनू को न आना था नाहीं वो आया ! क्यूंकि उसको कोई दूसरी लड़की मिल गयी थी,सुनयना को बाद में पता चला की सोनू का यही काम है !भोली -भली मासूम लड़कियों के ज़ज्बात से खेलना :'( और उस दिन के बाद सुनयना ने''ph.d '' की और आज एक 'प्रसिद्ध विश्वविध्यालय' में लेकचरार हैं उनका भरा -पूरा परिवार है ।'' उन्होने ये बात मुझे इस लिए बताई ताकि आज की भावी पीढ़ी उनके इस अनुभव से सबक ले सके ''
चलते =चलते = दिल तडपता रहा और वो जाने लगे.....
संग गुज़रे जमाने याद आने लगे .......
उनकी बेवफाई कुछ इस कदर काम आई .....
आज अपनों के साथ हम मुस्कराने लगे ......!!
और एक रात सुनयना अपना सब कुछ छोड़कर .....................!!
बहुत देर तक सुनयना ने सोनू का इंतज़ार किया,पर सोनू को न आना था नाहीं वो आया ! क्यूंकि उसको कोई दूसरी लड़की मिल गयी थी,सुनयना को बाद में पता चला की सोनू का यही काम है !भोली -भली मासूम लड़कियों के ज़ज्बात से खेलना :'( और उस दिन के बाद सुनयना ने''ph.d '' की और आज एक 'प्रसिद्ध विश्वविध्यालय' में लेकचरार हैं उनका भरा -पूरा परिवार है ।'' उन्होने ये बात मुझे इस लिए बताई ताकि आज की भावी पीढ़ी उनके इस अनुभव से सबक ले सके ''
चलते =चलते = दिल तडपता रहा और वो जाने लगे.....
संग गुज़रे जमाने याद आने लगे .......
उनकी बेवफाई कुछ इस कदर काम आई .....
आज अपनों के साथ हम मुस्कराने लगे ......!!

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