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Saturday, March 5, 2011

mano ya na mano (iv) part (STORY)

तनु जब आगे बढ़ी तो अचानक पीछे से उसे किसी ने खीच लिया जब तनु  ने मुड कर देखा तो महिमा खड़ी थी | उसने कहा की तुम गलत रास्ते पर जा रही थी| अगर तुम एक कदम और बढ़ा लेती तो और आगे के शब्द बाबाजी की आती हुई गंभीर आवाज़ मे खो गए| तनु तुम्हे अब हर कदम पर हमारी जरुरत पडेगी और यह कहकर बाबाजी anterdhayan हो गए | महिमा तनु को एक अनजान सफ़र पर लेकर निकल पड़ी | रास्ते मे तनु ने देखा की जो बाते उसने बुक्स मे पढ़ी थी या अपनी दादी से सुनी थी वही बाते अब वो स्वयं देख रही है |
 
उसने देखा की वह जैसे प्राचीन युग  मे आ गयी है, और उन के आगे 
एक अतभुत छठा बिखेरती एक तेजस्वनी युवती
उन्हे महिमा ने प्रणाम किया और कहा की वो भविष्य से एक  दिव्य विभूति  ले आये हैं |    

उन्होने एक नज़र तनु पर डाली
उसके बाद तनु ने महिमा को देखा तो वो दीखाई नहीं दी |तनु की समझ 
मे नहीं आया की वो क्या करे वो वही एक पेड़ के सहारे बैठ गयी |तभी 
तनु को लगा की कोई उसके पाँव दबा रहा है जब उसने देखा तो वहा 
एक खरगोश था |तनु ने उस खरगोश को हाथ मे उठा लिया तो वो 



एक नन्ही सी परी बन गया और तनु से बोला की तुम भविष्य से 
आई हो न तुम्हे और तुम्हारे बच्चे को बहूत बडे बडे काम करने है 
आने वाले वक़्त मे हो सकता है की तुम वापस अपनी दुनिया मे 
न पहुच पाओ |ये बात सुनते ही तनु को राजन की याद सताने लगी 
और उसकी आंखे बंद होने लगी उसने देखा की घर मे उसकी JAISE 
ही एक और तनु भी है और दोनों बाते कर रहे हैं |तनु ने अपना हाथ 
बढ़ा कर राजन को TOUCH किया तो राजन इधर उधर देखने लगा 
उसने सामने बैठी तनु से कहा की मुझे ऐसा लगा की तुमने मुझे पीछे 
से  छुआ  है| पर तुम तो मेरे सामने बैठी हो | तनु ने अपना हाथ खीच 
लिया तनु अपना घर देख पा रही थी और राजन व दूसरी तनु की बात 
सुन पा रही थी |वो एक बात से तो निश्चिन्त हो गयी की राजन उसे                    
ढून्ढ रहे होंगे |अब वो अपना सारा ध्यान अपनी आने वाले मकसद 
पर देना चाहती थी| तभी युवती 
वहाआई और उसने तनु को एक अतभुत पुष्प दिया |     


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और कहा की यह फूल कभी मुरझायेगा नहीं और तुम इससे कोई 
मदद भी मंगा सकती हो यह फूल जिसकी तुम्हे जरुरत होगी उसके
पास अपनी खुशबु भेज देगा और वह तुम्हारे पास आ जायेगा और 
यह कह कर वो फिर से अपनी पूजा मे व्यवस्त हो गयी |तनु ने वहा
 रुकना उचित नहीं समझा|
 तनु चलते चलते एक सरोवर मे पहुची वहा उसने देखा की बहुत सारे 


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 व्यक्ति सरोवर मे से पुष्प तोड़ रहे है और उन्हे एक कुएय मे डाल रहे 
हैं |तनु वाही बैठ गयी तभी दो छोटी छोटी लडकिय वहा आई और 
उन्होने तनु को कुछ फल दिए तनु ने मना कर दिया तो वो दोनों 
लडकिय तनु को अपने हाथ से खिलाने लगी |फल खाते ही तनु 
को लगा की वो मोती होती जा रही है |वो घबरा गयी उसने उन दोनों लडकियों की तरफ देखा तो वो दोनों वहा नहीं थी |उसने फिर घबरा कर 
अपनी तरफ देखा तो सब कुछ नोर्मल था | तभी उसे उस फूल की याद 
आई उसने देखा की वो फूल उसके पास नहीं है |

तभी उसके पास महिमा आ कर कड़ी हो गयी | उसने कहा की वो फूल तुम्हारे ही पास है देखो तनु ने देखा वो उसके ही पास था |महिमा ने कहा 
अब तुम्हारा वो वक़्त आ गया है |जब तुम्हे हमारे साथ साथ ही रहना 
पडेगा यह कह कर महिमा ने तनु को गोद मे खिलोने की तरह उठा
 लिया |
                                              to be continued 
  

Friday, March 4, 2011

mano ya na mano (iii) part (STORY)

तनु ने देखा की उसने जिसका हाथ पकड़ा है उसके face
पर रौशनी ही रौशनी है | वो किसके साथ है वो समझनहीं  
पा रही थी | अचनक जैसे ही उसकी नज़र face से हटी तो 
उसने देखा की वो बादलो की दुनिया मे  है | चारो तरफ 
गोल्डेन और सिल्वर लाइट थी | उसे अपने सिवा कोई भी देखाए नहीं दे रहा था | इतने मे उसने कोई आवाज़ सुनी 
जैसे ही उसने सामने की तरफ देखा तो वहा एक रथ खड़ा 
था | तनु उसमे जाकर बैठ gaye रथ के अंदर उसने देखा की बहुत सारे व्यक्ति बैठे हैं | पर वो उन सबके faces नहीं 
देख पा रही थी क्युकी उन सबके चेहरों पर गोल्डेन रौशनी थी वो तो उनकी तरफ देख भी बड़ी मुश्किल से 
रही थी | 

रथ चल रहा है या वही खड़ा है तनु को कुछ भी पता नहीं चल रहा था | तनु को एका एक बड़ी ठण्ड लगने लगी |
तो साथ बैठे व्यक्ति ने उसको आसमान मे से एक बादल 
 लेकर उढा दिया तनु को बहुत अच्छा लगा उसकी आंखे 
बंद होने लगी |

राजन को बहार गए आज दो दिन पूरे हो गयेथे|
वह घर आया तो उसने देख की तनु हमेशा की तरह काम मे लगी है |तनु ने पुछा की उसका ट्रिप कैसा रहा? राजन 
मुस्करा दिया और फिर फ्रेश होकर वह अपने काम से 
बहार चला गया |                                 

तनु की आंख जब खुली तो उसने देखा की वो एक झील 
मे नाव पर है कोई उसको चलाने वाला नहीं है नाव खुद 
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चल रही है | बादल की वो चादर उसने अभी भी ओढ़ 
रखी थी | फिर तनु को अचानक बासुरी की मीठी धुन 
सुनाई देने लगी वो आवाज़ इतनी मंत्र मुग्ध करने वाली 
थी की तनु सब कुछ भूल कर उस धुन मे ही खो गयी |

राजन जब रात को वापस आया तो उसने तनु से पुछा 
की विभा कब गयी तनु ने कहा आपके आने से थोडा 
पहले फिर राजन अपनी files मे डूब गया | तनु एक पेपर 
पर गेम खलने लगी |

तनु बासुरी की धुन मे इतना खो गये की कब उसके पास 
महिमा madika आ गयी उसे पता ही नहीं चला |उन दोनों 
ने उसे नाव मे से उतारा और सामने एक सुनहरी रौशनी 
मे उसको लेकर चलती गयी आगे जाने पर तनु ने देखा 
की वो एक आश्रम है | वहा उसने हिरन के बच्चे देखे 
जो खेल रहे थे महिमा ने एक मर्ग छोने को गोद मे ले 
लिया और तनु को साथ लेकर आगे बढ़ गयी
 
 राजन काम करते huey ये सोच रहा था की तनु पहले 
से कितनी अलग लगने लगी है | पहले तो राजन को तनु इतनी धयान नहीं आती थी पर अब तो पल पल तनु की 
याद सताती है |
 
तनु को वहा बैठ कर अच्छा लगा तभी वहा उसके पास आकर बहुत सारे बच्चे बैठ गये सारे बच्चे किसी देव दूत 
से कम नहीं लग रहे थे | सभी मंत्रो का उच्चारण कर रहे थे | तभी एक lady ने तनु को हाथ पकड़ कर उठाया और 
उसको एक कमरे मे ले गयी | उस कमरे की बात ही अलग थी कमरे की छत एसी थी जैसे आसमान हो 
दीवारे चाँदी सोने की तरह चमक रही थी | तनु ने एक 
दीवार मे हाथ लगाया तो उसका हाथ दीवार के बहार चला गया तनु उस दीवार से बहार चली गयी |बहार आकर उसने देखा की वो एक गार्डेन मे खड़ी है वहा पेड़
ऐसे चमक रहे थे मानो सकडो इन्द्रधनुष एक साथ चमक रहे हो |वो आगे बढने लगी फिर क्या हुआ ?? 
                                                     to be continued       
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Thursday, March 3, 2011

mano ya na mano (ii) part (STORY)

                
तनु गहरी नींद से जागी तो उसने देखा की वो वहा नहीं है 
जहा वो सोने से पहले थी | उसे लगा की वो तो किसी और दुनिया मे आ gaye है वो bed से उठी तो उसने देखा की चारो तरफ कोहरा ही कोहरा है| उसने आगे जाने के लिए 
कदम बढ़ाये पर उसे कुछ भी dekhaye नहीं दे रहा था |

उसने महिमा madika को याद किया दोनों उसके सामने आ गए और उसने देखा की वो वही पर है जहा दोनों उसको लेकर aaye थी | तनु कुछ भी समझ नहीं आ रहा था उसने प्रशन भरी निगाहों से महिमा और madika 
को देखा |

वो  दोनों ने उसके प्रशन को समझते huey भी अनजान 
बन gaye महिमा ने उसको विचित्र से फल खाने को deye 
तनु ने ऐसे फल कभी नहीं देखे थे उसे bhook लगी थी 
उसने खा लिए इतने tasty फल उसने कभी नहीं खाए थे|
उसे अपने अंदर एक शक्ति का अहसास होने लगा |

अचानक उसे राजन की याद आने लगी वो सोचने लगी 
की राजन उसे dhund रहे होंगे बस उसने इतना सोचा ही 
था की उसने देखा की वो अपने घर के सामने खड़ी है और उसे याद आया की राजन की माँ aaye है |
और डॉ. ने क्या कहा था इतने मे राजन आ गए वैसा कुछ भी नहीं था जैसा तनु को लगा था सब कुछ normal था | उसने कुछ देर के लिए सब कुछ सोचना छोड़ दिया और सिर्फ राजन पर ध्यान देने लगी |         
   
उसने kitchen मे जाकर खाना बनाना शुरू ही किया था 
की राजन उससे कहा की क्या कर रही हो टेबल पर खाना 
लगा कर और किसके लिए खाना बना रही हो वो विस्मित सि खड़ी रहा gaye फिर वो टेबल पर aaye और 
राजन के साथ खाना खाने लगी बिलकुल उसके हाथ जैसा ही खाना बना था |

राजन ने तनु से कहा की वो दो दिन के लिए बहार जा रहा है | फिर उससे कहा की वो भी उसके साथ चले पर 
तनु ने मना कर दिया | तो राजन ने कहा की मे तुम्हारी         
सहेली विभा को बुला लेता हूँ | तनु ने कुछ नहीं कहा |
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सुबह विभा तनु के साथ थी | अचानक तनु को विभा मे 
महिमा dekhaye देने लगी वो हडबडा गयी इतने मे विभा 
ने तनु का हाथ कस कर पकड़ लिया तनु को लगा की वो उड़ रही है उसने नीचे देखा तो वो जमीन पर ही खड़ी थी 
उसने विभा की तरफ देखा तो वो देखती ही रहा gaye ...
                                                             क्रमश:       
               

mano ya na mano (i) part (STORY)

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***यह तनु और राजन की स्टोरी एक काल्पनिक स्टोरी है,वास्तविक दुनिया से इसका कोई लेना -देना नहीं है |

तनु का घर हिल स्टेशन पर है पर उसका घर jungel से जुड़ा है| आज उसे यहाँ रहते huey पूरे दो साल हो गए है
कभी कभी तो वो ये सोचती है की इतने साल वो कैसे रह ली | अभी वो ये सोच ही रही थी की जैसे एक महात्मा
उसके सामने प्रकट हो गए वो देखती ही रह
तनु कुछ बोल पाती इतने मे ही वो बाबा बोल पडे आगे तुम्हे mari जरुरत पडेगी और फिर उन्होने तनु को को एक गोल्डेन फल दिया कहा की जब भी मुझे बुलाना हो तो तुम एस फल के सामने मुझे याद करना मे आ जाऊंगा | और यहाँ कह कर वो गायब हो गए | तनु वो फल हाथ मे लिए खड़ी रह gaye फिर वो अंदर aaye वो फल उसने छुपा दिया और सोचने लगी की वो महत्मा कोन थे और उसे उनकी जरुरत क्यों पडेगी | और वो फिर राजन का इन्तजारकरने लगी यहाँ तो मोबाइल भी सिग्नल catch नहीं करता न जाने वो कब तक आ पायेंगे |

और साथ ही वो ये भी सोच रही थी की वो ये बात अपने पति राजन को बताये या नहीं फिर उसने नहीं बताने का
निर्णय लिया | इतनी मे जसे ही वो पीछे मुड़ी सामने राजन खडे थे| अरे आप आ गए और मुझे पता भी नहींचला
राजन बिना कुछ कहे change करने चले गए | अचानक तनु को लगा के jase उसकी तबियत ख़राब हो रही है
फिर जब उसको होश आया वो बेड़ पर थी | राजन ने तनु से पूछा अब वो kaise है उसने कुछ नहींकहा वो फिर सो gaye रात भर राजन तनु के पास ही बैठा रहा | फिर तनु सुबह जागी तो देखा राजन उसके पास बठे बठे
ही सो गए हैं |
वो kitchen की तरफ जाने लगी तो राजन ने उसको वहा जाने से मना कर दिया | और फिर राजन ने ही kitchen
का काम संभाला राजन के जाने के बाद तनु को उस फल की याद aaye उसने वो फल निकला और उसको मंदिर
मे रख कर बाबाजी को याद किया | चारो तरफ रौशनी फ़ैल gaye सामने बाबाजी खडे थे उसने उनको नमस्कार
किया और पूछा की ये सब क्या है वो महात्मा जी बोले की अभी बताने का वक़्त नहीं आया है अभी तो वो उसी तरह रहे जैसे वो रहती है जब वक़्त आएगा तब वो बता देंगे | और यहाँ कह कर वो anterdhyan हो गए |

अचानक तनु को लगा की रात की तरह से फिर उसकी तबियत ख़राब हो रही है वो वाशबेसिन की तरफ भागी
वहा से आकर अभी खड़ी ही हुई थी की राजन आ गए तब उन्होने बताया की रात को डॉक्टर आये थे और उन्होने बताया की वो माँ बनने वाली है | तनु इतनी जल्दी ये सब कुछ नहीं चाहती थी पर अब किया भी क्या जा सकता है | राजन ने जल्द ही अपनी मम्मी को बुला लिया अब वो रात दिन उसको nasiat देने लगी | एक दिन तनु इन सब बातो से घबरा कर jungel की और निकल पड़ी वो चलती ही जा रही थी उसे कोई होश नहीं था चलते चलते वो एक cave के अंदर पहुच gaye सामने वही बाबाजी बैठे थे उन्होने कह आओ तनु तुम तो बड़ी जल्दी अपनी मंजिल की तरफ निकल पड़ी हो | उन्होने जो बाते उसको कही वो सब उसे किसी जादू से कम नहीं लगी वो सोचने लगी क्या ऐसा भी हो सकता है |
इतने मे ही न जाने kaha से दो परी की तरह दीखने वाली दो लडकिया निकल कर उसके सामने खड़ी हो gaye बाबाजी ने उसको उनके साथ जाने के लिए कहा | अचानक उसे अपने पति राजन की याद आ gaye उसने बाबाजी से कहा तो उन्होने कहा की वो इन सब बातो के बारे मे न सोचे उन दोनों लडकियों के नाम महिमा और madika थे वो दोनों तनु को लेकर गुफा के अंदर चली गए जैसे जैसे वो अंदर जाते जा रहे थे वैसे वैसे ही वो गुफा एक राजसी महल मे बदलती जा रही थी |
एक कमरे मे ले जाकर तनु को छोड़ दिया गया और उससे कहा की जब भी उसको जरुरत होगी वो दोनों आ जाएँगी | तनु को गहरी नींद आने लगी वो सो गयी |
तनु गहरी नींदसे जागी तो उसने देखा की वो वहा नहीं है
जहा वो सोने से पहले थी | उसे लगा की वो तो किसी और दुनिया मे आ
gaye है वो bed से उठी तो उसने देखा की चारो तरफ कोहरा ही कोहरा है|
उसने आगे जाने के लिए कदम बढ़ाये पर उसे कुछ भी dekhaye नहीं दे रहा था |उसने महिमा madika को याद किया दोनों उसके सामने आ गए और
उसने देखा की वो वही पर है जहा दोनों उसको लेकर aaye थी | तनु कुछ
भी समझ नहीं आ रहा था उसने प्रशन भरी निगाहों से महिमा और madika को देखा |
वो दोनों ने उसके प्रशन को समझते huey भी अनजान
बन gaye महिमा ने उसको विचित्र से फल खाने को deye
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तनु ने ऐसे फल कभी नहीं देखे थे उसे bhook लगी थी
उसने खा लिए इतने tasty फल उसने कभी नहीं खाए थे|
उसे अपने अंदर एक शक्ति का अहसास होने लगा |
अचानक उसे राजन की याद आने लगी वो सोचने लगी की राजन उसे
dhund रहे होंगे बस उसने इतना सोचा ही
था की उसने देखा की वो अपने घर मे मंदिर के सामने खड़ी है और उसे
याद आया की राजन की माँ aaye है |
और डॉ. ने क्या कहा था |
इतने मे राजन आ गए वैसा कुछ भी नहीं था जैसा तनु को लगा था सब
कुछ normal था | उसने कुछ देर के लिए
सब कुछ सोचना छोड़ दिया और सिर्फ राजन पर ध्यान देने लगी |
उसने kitchen मे जाकर खाना बनाना शुरू ही किया था
की राजन उससे कहा की क्या कर रही हो टेबल पर खाना
लगा कर और किसके लिए खाना बना रही हो वो विस्मित सि खड़ी रहा
gaye फिर वो टेबल पर aaye और राजन के साथ खाना खाने लगी बिलकुल उसके हाथ जैसा ही खाना बना था |friendship scraps, images, quotes graphics for orkut, myspace
राजन ने तनु से कहा की वो दो दिन के लिए बहार जा रहा है | फिर उससे
कहा की वो भी उसके साथ चले पर तनु ने मना कर दिया | तो राजन ने कह की मे तुम्हारी सहेली विभा को बुला लेता हूँ | तनु ने कुछ नहीं कहा |
सुबह विभा तनु के साथ थी | अचानक तनु को विभा मे महिमा dekhaye देने लगी वो हडबडा गयी इतने मे विभा ने तनु का हाथ कस कर पकड़ लिया तनु को लगा की वो उड़ रही है उसने नीचे देखा तो वो जमीन पर ही खड़ी थी
उसने विभा की तरफ देखा तो वो देखती ही रहा gaye ... क्युकी यहाँ तो कोई आता जाता नहीं |

क्रमश:


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