
''बांसुरी''
रोहित ने आज फिर कृष्ण भगवान् के मंदिर में रखी, उनकी गुल्लक में से पैसे ले लिए, और भगवान् जी से उन्हे लौटने का वादा करते हुएय, मार्केट चला गया| अपनी मनपसंद चीज लेने के लिए उसने, पहले अपनी मनपसंद टोफ्फी को मोर की आकृति में बनवा कर लिया |उसके यहाँ टोफ्फी मनचाही आकृति में बनवा कर ली जा सकती थी | उसके बाद उसने टॉय खरीदा और घर आ गया |
घर पहुचते ही माँ की आवाज़ आई ''मंदिर में से पैसे तुमने लिए हैं''? रोहित ने साफ़ झूट बोल दिया नहीं माँ |और रोहित जनता था की ,अब सारा गुस्सा छोटू पर उतरेगा |मगर यह क्या?! माँ ने उसको भी कुछ नहीं कहा |धीरे -धीरे समय बीतता गया,रोहित collage में आ गया था,परन्तु मंदिर से पैसे लेने का उसका क्रम जारी था | मंदिर से पैसे गायब होने के बावजूद भी, माँ ने मंदिर में पैसे रखना नही छोड़ा था |
मगर आज तो रोहित की निगाह कृष्ण की सोने की 'बांसुरी' पर थी, उसने सोचा माँ के सोने के बाद ..........................!!और फिर कृष्ण भी तो घर के ही हैं !सोने की लूँगा तो हीरे की बनवा कर दे दूंगा !!
और यह सोच कर रोहित एक खम्बे की आड़ में बैठ गया |और तभी उसकी अन्तेरात्मा चीत्कार उठी----- |तभी माँ की आती आवाज़ से रोहित की नींद खुल गयी ''क्या हुआ मेरे लाल तुझे क्या हो गया''|
चलते-चलते = तेरे सिवा कोई मेरे ज़ज्बात में नहीं
आँखों में वो नमी है जो बरसात में नहीं
खता हो गयी मुजसे बहुत बड़ी
क्या करू वही लकीर तो तुने मेरे हाथ में दी !

really vry beautful stry.... :) :D
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